1965 युद्ध में भारत से मुंह की खाने के बाद पाक बना रहा था मनगढ़ंत कहानियां, मामूली राइफलों से एयरक्राफ्ट गिराने के किए थे दावे

1965 की जंग हारने के बाद और जंग के दौरान भी पाकिस्तान में कई तरह की मनमानी कहानी सुनाई जाती रही थी। जंग के दौरान पाकिस्तान में दावा किया जाता था कि साधारण राइफल से पाक सैनिकों ने एयरक्राफ्ट को मार गिराया है।

वाघा-लाहौर सेक्टर के डोगरल गांव के पास नष्ट पाकिस्तानी टैंक (फोटो- एक्सप्रेस आर्काइव)

पाकिस्तान ने भारत के साथ एक अच्छा पड़ोसी होने जैसा कभी कोई काम नहीं किया। उलटा बंटवारे के बाद से जब भी मौका मिला तब आतंकवाद और युद्ध का उपयोग किया। 1965 में भी ऐसा ही हुआ था।

पाकिस्तान ने कश्मीर में घुसैपैठियों को भेजकर अपनी तरफ से युद्ध की शुरुआत कर दी थी। उसे उम्मीद थी कि पाकिस्तान के समर्थन में कश्मीर के युवा हथियार उठा लेंगे और भारत के खिलाफ बगावत कर देंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। 6 सितंबर 1965 को भारत ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए मोर्चा खोल दिया।

इस लड़ाई में पाकिस्तान को मुंह की खानी पड़ी। लेकिन अब खुद के देशवासियों के सामने सच कैसे कबूलते। तो ऐसे में तय हुआ कि जीत और ताकत की कहानियां पाकिस्तानी जनता को सुनाई जाएंगी। एक से बढ़कर एक कहानियां गढ़ी गईं। कहा जाता है कि युद्ध के दौरान और युद्ध के बाद भी कई बार पाकिस्तानी सरकार खुद ऐसी कहानियों को फैलवाती थी, ताकि लोगों को लगे कि वो जंग जीत रहे हैं। इन कहानियों में एक ऐसा किस्सा भी था जिसमें कहा गया था कि पाकिस्तानी फौजियों ने थ्री नॉट थ्री राइफल से लड़ाकू विमान मार गिराए थे।

इसलिए छेड़ा था युद्ध: अमेरिका में पाकिस्तान के पूर्व राजदूत रहे हुसैन हक्कानी ने अपनी किताब ‘भारत vs पाकिस्तान’ में लिखा है कि उस वक्त के पाकिस्तानी राष्ट्रपति जनरल अयूब खान भारत को कमजोर समझ रहे थे। उनका मानना था कि पंडित जवाहरलाल नेहरू के देहांत के बाद भारत कमजोर हो गया है और लाल बहादुर शास्त्री कुछ नहीं कर सकेंगे। साथ ही यह भी माना गया कि 1962 की लड़ाई में चीन से हारने की वजह से भारत अभी किसी भी तरह की युद्ध करने की स्थिति में नहीं है। तो ऐसे में उसपर युद्ध थोपकर जीत हासिल की जा सकती है।

कच्छ के रण से शुरू हुई ये जंग, कश्मीर, अमृतसर और लाहौर तक पहुंच गई थी। पहली बार भारतीय सेना अंतर्राष्ट्रीय सीमा को पार कर पाकिस्तान में घुसी थी। शास्त्री जी के नेतृत्व में भारतीय सेना को इस युद्ध में काफी सफलता मिली और पाकिस्तान को एक और शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा था।

युद्ध के समय पाकिस्तानी राष्ट्रपति जनरल अयूब खान ने पहले ही दिन ‘भारत के पास मौजूद शैतानी शक्तियों’ के बारे में जिक्र किया था। पाकिस्तानी मीडिया में अजीबो-गरीब बहादुरी के किस्से रोज छप रहे थे। इन कहानियों में ईश्वरीय मदद का भी जिक्र रहता था। ऐसा ही एक किस्सा है जिसमें यह दावा किया गया कि जब भारतीय सैनिक, टैंकों के साथ सियालकोट पहुंचे तो पाकिस्तानी सैनिक अपने शरीर पर बारूदी सुरंग लगाकर भारतीय टैंकों के आगे लेट गए थे। जिससे भारतीय टैंक नष्ट हो गए थे।

सबसे अजीब कहानी तो ये है कि साधारण राइफल थ्री-नॉट-थ्री से पाकिस्तानी सैनिकों ने भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों को मार गिराया था। जंग के दौरान कई लोगों ने दावा किया कि उन्होंने अपनी आंखों से देखा है कि किस तरह से हरा लबादा ओढ़े हुए फरिश्तों ने उन बमों का रुख मोड़ दिया जो मस्जिदों पर गिरने वाले थे।

हालांकि पाकिस्तान की इन फर्जी कहानियों की पोल हार के साथ ही धीरे-धीरे खुलने लगी थी। फिर भी लोगों का सरकार पर भरोसा बने रहे इसलिए ऐसी और नई कहानियों को किसी न किसी रूप में फैलाया जाता रहता था।

हालांकि युद्ध खत्म होने के बाद पाकिस्तानी आवाम को इसकी असलियत समझ आने ही लगी थी। इस लड़ाई में पाकिस्तान के 3800 सैनिकों की जान गई थी और सैकड़ों टैंक, कई लड़ाकू विमान भी नष्ट हो गए थे।

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