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पाबंदी के पैमाने

पवन रेखा हाल ही में मुंबई में एक हास्य कार्यक्रम और उसके वीडियो को यूट्यूब पर डाले जाने को लेकर काफी विवाद सामने आया। इसके बाद कार्यक्रम के आयोजक ने वह वीडियो यूट्यूब से हटा लिया। लेकिन मुंबई की एक संस्था की ओर से उस कार्यक्रम में हिस्सा लेने वाले अभिनेता रणवीर सिंह, करण जौहर […]
Author February 9, 2015 16:24 pm

पवन रेखा

हाल ही में मुंबई में एक हास्य कार्यक्रम और उसके वीडियो को यूट्यूब पर डाले जाने को लेकर काफी विवाद सामने आया। इसके बाद कार्यक्रम के आयोजक ने वह वीडियो यूट्यूब से हटा लिया। लेकिन मुंबई की एक संस्था की ओर से उस कार्यक्रम में हिस्सा लेने वाले अभिनेता रणवीर सिंह, करण जौहर और अर्जुन कपूर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने के बाद महाराष्ट्र सरकार ने इसकी जांच कराने की बात कही। दूसरी ओर, सेंसर बोर्ड के एक सदस्य अशोक पंडित ने उस कार्यक्रम को अश्लील बताते हुए जो टिप्पणी की, वह घनघोर आपत्तिजनक थी। क्या लोग उनके खिलाफ भी किसी तरह की पाबंदी की मांग करेंगे? साधारण-सी बात है कि अगर मुझे उनके किसी विचार या उनकी भाषा से समस्या है तो हम उनकी टिप्पणियां नहीं पढ़ेंगे। यही बात उस कार्यक्रम के बारे में कही जा सकती है।

जिस संस्था ने इस वीडियो के खिलाफ मुंबई में शिकायत दर्ज कराई, उसका कहना है कि इसमें काफी गाली-गलौज है; यह न सिर्फ भारतीय संस्कृति और महिलाओं की छवि को बर्बाद कर रहा है, बल्कि युवाओं को गुमराह भी कर रहा है। सवाल है कि क्या इंटरनेट पर इस तरह का यह अकेला वीडियो मौजूद था? आज के दौर में इंटरनेट पर हजारों ऐसे अश्लील वेबसाइट हैं, जिन तक लोगों की आसानी से पहुंच है। लेकिन क्या उन वेबसाइटों पर एकबारगी पाबंदी लगाई जा सकती है? उस एक वीडियो को हटवा दिया गया। मगर उन हजारों की तादाद में इटंरनेट पर उपलब्ध अश्लील सामग्रियों का क्या किया जाएगा, जिन्हें कई बार बलात्कार और छेड़खानी जैसी घटनाओं के लिए जिम्मेदार माना जाता है? क्या इन अपराधों को भारतीय संस्कृति के तौर पर देखा जाएगा? लेकिन ऐसी घटनाएं रोज होती रही हैं। अगर कुछ रोकने की जरूरत है तो पहले महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों, हत्याएं, भुखमरी, किसानों की आत्महत्या की लगातार घटनाओं पर लगाम लगाई जाए।

गौरतलब है कि अमेरिका के चैनल ‘कॉमेडी सेंट्रल’ ने 1998 में कॉमेडी चैनल रोस्ट नाम की एक शृंखला की शुरुआत की थी। लेकिन भारत के उलट अमेरिका में लोगों ने उस शो को हाथोंहाथ लिया था। अब इस चैनल पर प्रसारित होने वाला ‘कॉमेडी रोस्ट’ भारत सहित कई देशों के लोग देखते हैं। यह चैनल भारत में ज्यादातर केबल नेटवर्क पर उपलब्ध है। अगर इससे युवाओं पर बुरा असर पड़ता है तो इस पर भी पाबंदी लगाने की मांग क्यों नहीं की गई है? इस पर विवाद क्यों नहीं हुआ?

हम किसी चीज से सहमत या असहमत हो सकते हैं। विरोधस्वरूप अपने विचार भी रख सकते हैं। लेकिन दूसरों को क्या करना या नहीं करना है, क्या देखना या नहीं देखना है, क्या अश्लील है या नहीं है, यह तय करने का अधिकार केवल हमारा नहीं हो सकता। इस प्रकरण को देख कर लगता है कि देश में संस्कृति के ठेकेदारों ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को बाधित करने के लिए तमाम कायदों को तिलांजलि दे दी है। हर कोई संस्कृति को अपनी सहूलियत के हिसाब से परिभाषित कर रहा है और अपने विचारों को दूसरे पर थोपने की कोशिश कर रहा है। संस्कृति के इन ठेकेदारों को वाल्टेयर के उस मशहूर कथन को याद रखने की जरूरत है कि ‘हो सकता है मैं आपके विचारों से सहमत न हो पाऊं। फिर भी विचार प्रकट करने के आपके अधिकारों की रक्षा करने के लिए मैं अपनी जान भी दे सकता हूं।’

 

 

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