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महामहिम की पहचान

रवीश कुमार इस बात का पता किसी को नहीं चलता कि योग दिवस के कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति को नहीं बुलाया गया है, अगर आरएसएस के पूर्व प्रवक्ता और भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव राम माधव ट्वीट न करते। इसी तरह गणतंत्र दिवस के मौके पर सोशल मीडिया पर ‘शेम आॅन हामिद अंसारी’ ट्रेंड करने लगा था […]

Author June 24, 2015 5:24 PM

रवीश कुमार

इस बात का पता किसी को नहीं चलता कि योग दिवस के कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति को नहीं बुलाया गया है, अगर आरएसएस के पूर्व प्रवक्ता और भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव राम माधव ट्वीट न करते। इसी तरह गणतंत्र दिवस के मौके पर सोशल मीडिया पर ‘शेम आॅन हामिद अंसारी’ ट्रेंड करने लगा था कि उन्होंने राष्ट्रगान के वक्त तिरंगे को सलामी नहीं दी। उपराष्ट्रपति भवन को तब भी प्रेस विज्ञप्ति जारी करनी पड़ी थी कि राष्ट्रगान के समय जो मुख्य अतिथि होते हैं और जो वर्दी में होते हैं उन्हीं को सलामी देनी होती है।

बाकी को सावधान की मुद्रा में खड़े रहना पड़ता है। पद की संवैधानिक गरिमा के बावजूद उनकी निष्ठा को वक्त-बेवक्त मजहबी चश्मे से परखने की इस आदत का इलाज होना चाहिए। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व प्रवक्ता राम माधव ने अपना ट्वीट तुरंत डिलीट कर दिया, मगर तब तक कई लोगों ने उनके ट्वीट का फोटो उतार लिया था। उनका पहला ट्वीट था कि ‘क्या राज्यसभा टीवी, जो करदाता के पैसे चलता है, ने योग दिवस के कार्यक्रम का बहिष्कार किया है? राष्ट्रपति ने हिस्सा लिया, मगर उपराष्ट्रपति ने नहीं।’

राज्यसभा टीवी राज्यसभा के अंतर्गत आता है। उपराष्ट्रपति राज्यसभा के अध्यक्ष होते हैं। राम माधव ने फिर एक ट्वीट किया, ‘मुझे बताया गया कि उपराष्ट्रपति बीमार हैं। मैंने अपना ट्वीट वापस ले लिया। माफी मांगता हूं, क्योंकि उपराष्ट्रपति की संस्था का सम्मान किया जाना चाहिए।’ कम से कम माफी वाली ट्वीट तो रहने देते, लेकिन उसे भी डिलीट कर दिया। उपराष्ट्रपति भवन की तरफ से भी सफाई आ गई कि वे बीमार नहीं हैं। इसलिए उन्होंने हिस्सा नहीं लिया कि उन्हें योग कार्यक्रम के लिए बुलाया ही नहीं गया था। उपराष्ट्रपति उन्हीं कार्यक्रमों में जाते हैं, जहां संबंधित मंत्री प्रोटोकॉल के तहत उन्हें आमंत्रित करते हैं।

उपराष्ट्रपति के बारे में राम माधव की हर जानकारी गलत निकली। दक्षिणपंथी टिप्पणीकार और अंगरेजी के अखबारों में काफी समझदारी से लिखने वाले स्वपन दास गुप्ता के ट्वीट से मुझे भी हैरानी हुई। उनका भी ट्वीट भाषा और सोच में राम माधव से काफी मिलता-जुलता रहा, ‘सभी न्यूज चैनल योग दिवस का कार्यक्रम दिखा रहे हैं केवल एक को छोड़ कर। करदाताओं के पैसे से चलने वाला भारत का एकमात्र चैनल- राज्यसभा टीवी।’

राज्यसभा के एडिटर इन चीफ गुरदीप सप्पल ने ट्वीट किया कि ‘एक बार फिर आरएस टीवी के खिलाफ बेबुनियाद अफवाह कि हमने योग दिवस का ब्लैक आउट किया। सरासर झूठ। आज राजपथ और योग कॉन्फ्रेंस से आरएस टीवी पर लाइव रहा।’ उन्होंने एक प्रेस विज्ञप्ति भी जारी कर बताया कि यहां तक कि विदेशमंत्री सुषमा स्वराज का संयुक्त राष्ट्र में जो कार्यक्रम हुआ, उसे राज्यसभा टीवी पर दिखाया गया और ये सभी कार्यक्रम यू-ट्यूब पर भी उपलब्ध हैं।

आयुष मंत्री श्रीपाद नाईक ने कहा कि जब किसी कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मुख्य अतिथि बनते हैं, तो उपराष्ट्रपति और राष्ट्रपति को नहीं बुलाया जाता। इसलिए उन्हें आमंत्रित नहीं किया गया था। आयुष मंत्री की सफाई सही है। उनके मंत्रालय ने राज्यसभा, लोकसभा और दिल्ली के विधायकों को भी आमंत्रित किया था। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से लेकर उपराज्यपाल नजीब जंग को भी आमंत्रित किया गया था।

राजपथ पर शामिल लोगों की धर्म के आधार पर पहचान ठीक नहीं है। सरकार ने कई बार कहा है कि योग का धर्म से संबंध नहीं है। इसे ही सरकार की लाइन समझा जाना चाहिए, फिर भी मीडिया ने राजपथ पर आए लोगों में से मुसलमानों की तलाश की और अलग से सुर्खी बनाई। कैमरों ने अलग से खोजा कि इनमें मुसलमान हैं या नहीं। यह भी कम खतरनाक नहीं है।

एक साल में यह दूसरा मौका है जब उपराष्ट्रपति को लेकर विवाद हुआ है। गणतंत्र दिवस के मौके पर सोशल मीडिया के अनाम-अज्ञात लोग थे, मगर इस बार दो-दो जिम्मेदार लोगों ने प्रत्यक्ष और परोक्ष टिप्पणी कर दी। उपराष्ट्रपति को करीब से जानने वाले एक शख्स सकत सिंह काफी आहत हैं, उन्होंने एक इमेल भेजा है: ‘हामिद अंसारी साहब को तीस साल से जानने के कारण बता सकता हूं कि वे एक महान योगी हैं। मेरा आरएसएस और भाजपा से भी संबंध रहा है और मानता हूं कि हामिद अंसारी राष्ट्रवाद की हर परिभाषा में फिट बैठते हैं। वे और उनकी पत्नी सलमाजी योग करते रहे हैं।’
क्या यह छोटी गलती है, जिसके बारे में केंद्रीय मंत्री श्रीपाद नाईक ने कहा कि आदमी ही हैं, गलती हो जाती है। दोबारा यह गलती हुई है, इस बार सोशल मीडिया के अज्ञात लोगों से नहीं, बल्कि जिम्मेदार लोगों से।

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