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चौपालः निशाने पर युवा

वर्तमान समय में सोशल मीडिया ने युवाओं की जिंदगी को बदल कर रख दिया है। हर समय युवा वर्ग अपने मोबाइल से चिपका मिलता है।

निशाने पर युवा

वर्तमान समय में सोशल मीडिया ने युवाओं की जिंदगी को बदल कर रख दिया है। हर समय युवा वर्ग अपने मोबाइल से चिपका मिलता है। इसका युवाओं पर सकारात्मक के बजाय नकारात्मक प्रभाव ज्यादा देखने को मिल रहा है। यहां तक कि अपराध की दुनिया कदम रख चुके युवा भी सोशल मीडिया का सहारा ले रहे हैं। कुछ लोग किसी वीडियो या फोटो को तोड़-मरोड़ कर सोशल मीडिया पर डाल देते हैं, जो कई बार हिंसा और भावनाओं को भड़काने का काम करता है। इस माध्यम का नकारात्मक इस्तेमाल समाज, देश और यहां तक कि अपने जीवन के लिए भी अभिशाप बन जाता है।

जबकि अगर युवा सही तरीके से सोशल मीडिया को अपनाए तो वह इसका बहुत फायदा उठाया जा सकता है। सूचना के आदान-प्रदान, जनमत तैयार करने, विभिन्न संस्कृतियों के लोगों को आपस में जोड़ने, प्रतियोगी परीक्षाओं के तैयारी करने से लेकर रोजगार के मौके खोजने और व्यापार में भी सोशल मीडिया मददगार होता है। सोशल मीडिया को एक सशक्त और बेजोड़ उपकरण के रूप में प्रयोग कर युवा शक्ति खुद को और अपने देश को फायदा पंहुचा सकते हैं।

अंकित कुमार, करनाल

इंसानी हक

सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले से यह साबित हुआ है कि हमारा संविधान सभी नागरिकों को गरिमामय जीवन जीने का अधिकार देता है। यह फैसला सराहनीय है कि यदि कोई भी दो लोग अपनी मर्जी से जिंदगी जीना चाहते हैं तो उसमें हर्ज क्या है। क्यों हम उन्हें हिकारत की नजर से देखें? जीवन उनका है, यह उन पर निर्भर करता है कि वे किसके साथ उसको व्यतीत करना चाहते हैं। फिर क्यों हमारे समाज का यह वर्ग इसमें एक शर्मिंदगी महसूस करें और खुल कर सामने आने में या किसी समलिंगी के साथ अपने रिश्ते को छिपाने की जरूरत महसूस करे।

प्रेरणा मालवीया, भोपाल

निरर्थक नोटबंदी

सरकार ने अचानक नोटबंदी की घोषणा की थी। कहा गया कि काला धन पकड़ा जाएगा और भ्रष्टाचार खत्म हो जाएगा। लेकिन भारतीय रिजर्व बैंक के मुताबिक 99.3 प्रतिशत पुराने नोट बैंकिंग व्यवस्था में वापस आ गए। न तो आतंकवाद और भ्रष्टाचार खत्म हुआ, न काला धन पकड़ा गया। रुपया नीचे लुढ़क गया, महंगाई आसमान छू रही है। अब सरकार को इसका जवाब देना चाहिए कि नोटबंदी का मकसद आखिर क्या था!

जफर अहमद, मधेपुरा, बिहार

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