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चौपालः पतन की ओर

कुछ दन पूर्व कानपुर के एक गांव में छह से 12 साल के बच्चों द्वारा चार साल की बच्ची से दुष्कर्म करने की मानवीय संवेदनाओं को झकझोरने वाली खबर आई।

Author July 12, 2018 05:21 am
चित्र का इस्तेमाल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है। (फोटो: रॉयटर्स)

कुछ दन पूर्व कानपुर के एक गांव में छह से 12 साल के बच्चों द्वारा चार साल की बच्ची से दुष्कर्म करने की मानवीय संवेदनाओं को झकझोरने वाली खबर आई। जांच में पता चला बच्चों ने मोबाइल में अश्लील फिल्म देखने के बाद इस वारदात को अंजाम दिया। हाल के दिनों में अश्लील यानी पोर्नोग्राफिक सामग्री देखने-पढ़ने की दर में तेजी से वृद्धि हुई है। सस्ते स्मार्टफोन के लगभग निशुल्क इंटरनेट डेटा और हर वर्ग के व्यक्ति के पास इसकी उपलब्धता से अश्लील सामग्री का तेजी से प्रसार हुआ है। कई कंपनियों द्वारा कॉम्बो इंटरनेट पैक या मुफ्त इंटरनेट सेवा उपलब्ध कराए जाने से लोग किसी भी तरह स्मार्टफोन खरीद कर सूचना तकनीक एवं नई-नई जानकारी पाने की बजाय स्तरहीन मनोरंजन, खासकर अश्लील सामग्री देखने में ज्यादा समय बिता रहे हैं। अभिभावक भी बच्चों को पुरस्कार स्वरूप स्मार्टफोन दे रहे हैं। विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा लोकलुभावन योजनाओं के अंतर्गत भी विद्यार्थियों को स्मार्टफोन बांटे जा रहे हैं। इस सबके बीच किसी ने यह चिंता व्यक्त नहीं की कि इंटरनेट की दुनिया में सहज व निशुल्क उपलब्ध अश्लील सामग्री को बच्चों तक पहुंचने से कैसे रोका जाए?

अश्लील फिल्में देखने की लत देश की युवा पीढ़ी को गर्त में ले जा रही है। किशोरों, युवाओं का चारित्रिक पतन हो रहा है। अश्लील चलचित्र और साहित्य के प्रभाव में प्रयोगधर्मी बन कर किशोरवय बच्चे कुकृत्य करते हुए अपराधी बन रहे हैं। समाज में बढ़ रहे यौन अपराधों में सबसे ज्यादा योगदान आसानी से मिल जाने वाली पोर्नोग्राफिक सामग्री का ही है। भारत में पोर्नोग्राफी पर लगाम लगाने के लिए सरकारी प्रयास न के बराबर हैं। इसके लिए इच्छाशक्ति का अभाव साफ देखा जा रहा है। हालांकि सरकार ने पिछले साल जून में बाल पोर्नोग्राफी वाली 3522 वेबसाइटों को ‘ब्लाक’ किया था लेकिन यह कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। इससे पूर्व भी सरकार ने इंटरनेट पर भारत में संचालित सभी पोर्न साइट्स पर प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया था, लेकिन उस समय कुछ लोगों द्वारा पश्चिमी संस्कृति के अंधानुकरण के फेर में कथित निजता के अधिकार, चुनने के अधिकार, व्यक्तिगत स्वतंत्रता के नाम पर कड़े विरोध का माहौल बनाया गया, जिससे सरकार ने हाथ पीछे खींच लिए।

जब मध्य-पूर्व के इस्लामिक देश और हमसे अधिक आबादी वाला चीन अपने यहां सभी प्रकार के पोर्न पर पूर्णत: प्रतिबंध लगा सकता है तो हमारे देश में भी यह अवश्य संभव है बशर्ते सरकार मुट्ठी भर लोगों की परवाह किए बगैर कड़े फैसले ले। अभिभावकों को भी और अधिक सतर्कता और जिम्मेदारी से काम लेते हुए बच्चों को स्वस्थ मनोरंजन के लिए प्रेरित करना होगा। समाज को पतन से बचाने के लिए देश में बाल पोर्नोग्राफी के साथ-साथ सभी प्रकार के पोर्न पर प्रतिबंध लगाना अत्यावश्यक हो गया है तभी देश की युवा पीढ़ी अपने बहुमूल्य समय व ऊर्जा का उपयोग मुल्क के विकास के लिए करने की दिशा में बढ़ पाएगी।

ऋषभ देव पांडेय, जशपुर, छत्तीसगढ़

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