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चौपालः हादसे की सड़क

हिमाचल प्रदेश के कांगडा जिले में नौ अप्रैल को स्कूल बस के लगभग 150 फीट गहरी खाई में गिरने से 27 बच्चों सहित 29 लोगों की दर्दनाक मौत की खबर ने हर किसी को विचलित और सरकार-प्रशासन को कठघरे में खड़ा कर दिया है।

Author April 11, 2018 3:59 AM
सरकार और प्रशासन को स्कूल वाहनों की भी नियमित जांच की करानी चाहिए।

हिमाचल प्रदेश के कांगडा जिले में नौ अप्रैल को स्कूल बस के लगभग 150 फीट गहरी खाई में गिरने से 27 बच्चों सहित 29 लोगों की दर्दनाक मौत की खबर ने हर किसी को विचलित और सरकार-प्रशासन को कठघरे में खड़ा कर दिया है। प्रदेश सरकार ने इस दुर्घटना में मारे गए लोगों के परिवारजनों को मुआवजे की भी घोषणा की, लेकिन इस मुआवजे से उनके जख्मों पर शायद ही मरहम लगे, जिन्होंने अपने घर का चिराग खो दिया है। जिस जगह यह हादसा हुआ, उसके बारे में पढ़ने को मिला कि यहां सड़क की हालत ठीक नहीं थी, और पहले भी यहां दुर्घटना हो चुकी है। आखिर सरकार और प्रशासन क्यों नहीं सड़कों की गुणवत्ता की समय-समय पर जांच कराते? क्यों सरकार और प्रशासन किसी दुर्घटना के बाद ही कुंभकर्णी नींद से जागते हैं? खासतौर पर पहाड़ी इलाकों में तो खराब सड़कें हादसों का कारण बनती हैं। सरकार और प्रशासन को स्कूल वाहनों की भी नियमित जांच की करानी चाहिए।

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राजेश कुमार चौहान, जालंधर

बेगुनाही की सजा

आतंकवाद व देशद्रोह के ऐसे अनेक मामले सामने आ रहे हैं जिनमें न्याय के नाम पर जम कर मानवाधिकार का हनन हो रहा है। कई बार पुलिस निर्दोष लोगों को भी फंसा देती है। ऐसा सिर्फ इसलिए किया जाता है कि पुलिस को सरकार को बताना पड़ता है कि उसने दोषी को पकड़ लिया है। लेकिन पकड़े गए लोगों में से अनेक पांच साल, दस साल या पंद्रह साल जेल में काटने के बाद अदालत से बरी हो जाते हैं। मोहम्मद आमिर खान एक ऐसा ही नाम है जिसे 1998 के सिलसिलेवार बम धमाकों के मामले में गिरफ्तार किया गया था। चौदह साल बाद वह निर्दोष साबित होता है। उसके बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के आदेश पर पांच लाख रुपए का मुआवजा दिया जाता है। उसे मिलने में भी पांच साल लग जाते हैं। क्या यही सत्यमेव जयते है? आमिर की यह मांग सही है कि जो आतंकी हैं, उन्हें समर्पण कराने के लिए तो ढेरों ऑफर दिए जाते हैं लेकिन जो बिना कोई गुनाह किए सजा काटते हैं उनके लिए मुआवजे का प्रावधान क्यों नहीं किया जाता?

जंग बहादुर सिंह, गोलपहाड़ी

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