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चौपालः वैकल्पिक मजदूर

अब देखना है कि जहां-जहां ये जगहें खाली हुई हैं, उनके कामों की पूर्ति क्या स्थानीय निवासी रोजगार के इच्छुक लोग कर पाएंगे।

Author Published on: May 23, 2020 3:01 AM
देखना है कि जहां-जहां ये जगहें खाली हुई हैं, उनके कामों की पूर्ति क्या स्थानीय निवासी रोजगार के इच्छुक लोग कर पाएंगे।

प्रवासी मजदूरों को अपने गृह स्थानों में भेजकर कई राज्य सरकारों ने अपने कर्तव्य पालन किया है। वे अपने परिवार से दूर थे और अपने गांव से दूर किसी शहर में उनकी रोजी-रोटी के दरवाजे भी बंद हो गए थे। उनमें बहुत सारे कुशल और अकुशल कामगार जो बेरोजगार हो गए हैं वे अपने गृह राज्यों में पहुंच कर जीविकोपार्जन के कुछ माध्यम जरूर खोजने की कोशिश करेंगे। अब देखना है कि जहां-जहां ये जगहें खाली हुई हैं, उनके कामों की पूर्ति क्या स्थानीय निवासी रोजगार के इच्छुक लोग कर पाएंगे। सस्ते मजदूर के रूप में काम करने वाले प्रवासी बेरोजगार तो मजबूरी में स्थानांतरित हो गए, अब उनके इन कार्य निष्पादन जिम्मेदारी स्थानीय कामगारों को संभालने की नौबत आ गई है। अगर उत्पादन और काम की शुरूआत जल्दी नहीं हुई तो देश की आर्थिक व्यवस्था और सामाजिक ढांचा तहस-नहस हो जाएगा।
-युगल किशोर शर्मा, खाम्बी, फरीदाबाद

रोजगार की राह
यह समाचार दुर्भाग्यपूर्ण है कि भारत सरकार कोरोना त्रासदी के आर्थिक संकट में पूर्व स्वीकृत रेलवे पटरियों के दोहरीकरण, गेज परिवर्तन सहित नई परियोजनाएँ स्थगित कर रही है। अगर संकट का दौर है तो नए प्रस्ताव स्वीकार भले न किए जाएं, लेकिन पुराने को रद्द करना देश को कहां ले जाएगा? आज की ज्वलंत समस्या काम के अभाव में पलायन कर रहे प्रवासी मजदूर है। उन्हें वोट बैंक की लालच में उनके घर भेजने की चिंता करने के बजाय प्राथमिकता के आधार पर उनके लिए रोजगार उपलब्ध कराया जाए।
-राधेश्याम ताम्रकर, ठीकरी (मप्र)

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