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चौपाल: धुएं की घुटन

आखिर क्या मिलता है लोगों को धुआं उड़ाने से और इसी धुएं में गुम होकर बेवजह खुद को मिटाने से। लोगों को पता है कि ये चीजें उनको अंदर से खोखला कर देती हैं, पर फिर भी पता नहीं क्यों, वे लत की हद तक जाकर सेवन करते है इन चीजों का, जो बेहद हानिकारक […]

धूम्रपान करने वाले लोग समाज में जहर घोल रहे हैं। इसका खामियाजा दूसरों के साथ उन्हें खुद को भी भुगतना पड़ता है।

आखिर क्या मिलता है लोगों को धुआं उड़ाने से और इसी धुएं में गुम होकर बेवजह खुद को मिटाने से। लोगों को पता है कि ये चीजें उनको अंदर से खोखला कर देती हैं, पर फिर भी पता नहीं क्यों, वे लत की हद तक जाकर सेवन करते है इन चीजों का, जो बेहद हानिकारक होती है स्वास्थ के लिए। बहरहाल, महाराष्ट्र खुली सिगरेट बीड़ी की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने वाला देश का पहला राज्य बन गया है।

हाल ही में महाराष्ट्र के स्वास्थ्य विभाग की तरफ से यह अधिसूचना जारी की गई, जिसमें कहा गया कि कानून के मुताबिक सिगरेट-बीड़ी समेत सभी तंबाकू उत्पादों के पैकेट पर स्वास्थ्य चेतावनी लिखना अनिवार्य है। 2003 के कानून के अनुसार राज्य में खुली सिगरेट और बीड़ी की बिक्री पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी गई है।

स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि जब लोग खुली सिगरेट और बीड़ी खरीदते हैं, तो वे इससे संबंधित चेतावनी नहीं देख पाते हैं। जबकि धूम्रपान से कैंसर और दूसरी घातक बीमारियां होती हैं और इससे संबंधित चेतावनी के बारे में सबको जानना चाहिए। इसलिए सरकार ने खुली सिगरेट, बीड़ी की बिक्री पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। यह एक स्वागतयोग्य पहल है। इस कदम के बाद स्वास्थ्य विशेषज्ञ और डॉक्टरों की यह उम्मीद जताई जा रही है कि इससे युवाओं में धूम्रपान की आदत कम होगी।

गौरतलब है कि भारत में सोलह-सत्रह साल के किशोरों में भी धूम्रपान की आदत बहुत ज्यादा है। उनके पास हमेशा ज्यादा पैसे नहीं होते, इसलिए वे पैकेट की बजाय खुली सिगरेट खरीदते हैं और खुली सिगरेट खरीदने वालों को कभी भी तंबाकू उत्पादों के पैकेट पर लिखी चेतावनी पर गौर करने का मौका नहीं मिलता है और वे इससे बेफिक्र रहते हैं।

एक अध्ययन के मुताबिक महाराष्ट्र में धूम्रपान की दर देश में सबसे कम है। लेकिन सच यह है कि तंबाकू उत्पादों से दुनियाभर में हर साल अस्सी लाख लोगों की मौत हो रही है। इनमें सत्तर लाख मौतें सीधे तौर पर तंबाकू लेने वालों की हो रही हैं। मरने वालों में करीब बारह लाख लोग एसे हैं, जो सीधे तौर पर धूम्रपान नहीं करते, लेकिन धूम्रपान करने वालों के आसपास रहते हैं। ऐसे लोग भी खतरे की जद में होते हैं।
’निधि जैन, लोनी, गाजियाबाद, उप्र

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