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चौपाल: बहिष्कार से पहले

खाद्य एवं कृषि संगठन की रिपोर्ट, 2019 के अनुसार भारत में 195.9 मिलियन लोग भुखमरी के शिकार हैं। यह कैसी विडंबना है? सही मायने में बहिष्कार का उद्देश्य देश के हित, सम्मान और समाज की समस्याओं को दूर करने के लिए होना चाहिए। लेकिन ऐसा होता नहीं दिख रहा है। यह एक चिंताजनक प्रवृत्ति है।

Author Published on: June 30, 2020 3:20 AM
Boycott chinaदेश भर में चीन के प्रोडक्ट को इस्तेमाल ना करने की जंग चालू है। (प्रतिकात्मक तस्वीर)

जिस प्रकार एक शब्द के कई अर्थ होते हैं, ठीक वैसे ही बहिष्कार के भी कई अर्थ हो सकते हैं। कुछ लोगों की नजर में बहिष्कार मात्र दिखावा है, तो कुछ लोगों के लिए इसी बहाने अपनी राजनीति को चमकाना है। दूसरी तरफ करोड़ों लोग एक वक्त की रोटी के लिए दर-दर भटक रहे हैं। इनके लिए बहिष्कार करना दूर की कौड़ी है।

खाद्य एवं कृषि संगठन की रिपोर्ट, 2019 के अनुसार भारत में 195.9 मिलियन लोग भुखमरी के शिकार हैं। यह कैसी विडंबना है? सही मायने में बहिष्कार का उद्देश्य देश के हित, सम्मान और समाज की समस्याओं को दूर करने के लिए होना चाहिए। लेकिन ऐसा होता नहीं दिख रहा है। यह एक चिंताजनक प्रवृत्ति है।

फिर संपूर्ण बहिष्कार तब तक नहीं करना चाहिए जब तक हम पूरी तरह यानी सौ फीसदी विकल्प देने के लिए तैयार न हों। अगर तैयार हैं तो ‘मेक इन इंडिया 2.0’, ‘आत्मनिर्भर भारत अभियान’ को साकार किया जा सकेगा, बल्कि बहिष्कार केवल जुबानी ही रह जाएगा। वह कभी भी सफल नहीं होगा। एक प्रसिद्ध कहावत है कि किसी काम को करने है पहले सौ बार अवश्य सोचना चाहिए!
’राहुल पटेल, लखीमपुर खीरी, उप्र

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