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चौपालः बिन पानी

कैसी विडंबना है कि पानी को देवता के समान पूजने और उसकी महत्ता का बखान करने वाला देश आज जल के महत्त्व को भूल चुका है। नीति आयोग की एक चौंकाने वाली रिपोर्ट में बताया गया है कि हमारे गांवों की 84 फीसद आबादी जलापूर्ति से वंचित है।

Author July 5, 2018 6:58 AM
प्रतीकात्मक चित्र

बिन पानी

कैसी विडंबना है कि पानी को देवता के समान पूजने और उसकी महत्ता का बखान करने वाला देश आज जल के महत्त्व को भूल चुका है। नीति आयोग की एक चौंकाने वाली रिपोर्ट में बताया गया है कि हमारे गांवों की 84 फीसद आबादी जलापूर्ति से वंचित है। एक और आंकड़े में इस बात का खुलासा हुआ है कि उपलब्ध जल का 70 फीसद भाग प्रदूषित है। वैश्विक जल गुणवत्ता सूचकांक 2016-2017 के अनुसार 122 देशों की सूची में भारत 120 वें स्थान पर है। संयुक्त राष्ट्र की एक अन्य रिपोर्ट बताती है कि दुनिया में हर रोज चार हजार बच्चे जल जनित बीमारियों के कारण काल के गाल में समा जाते हैं।

जल संरक्षण और संग्रहण के मामले में इजराइल एक अनोखा उदाहरण है। वहां बेहतरीन जल प्रबंधन तकनीक के कारण एक बूंद पानी भी बरबाद नहीं जाता है। इस बाबत हमें इजराइल से सीखने की आवश्यकता है। यदि हम देश के जमीनी क्षेत्रफल में से सिर्फ पांच फीसद में होने वाली वर्षा के जल का संग्रहण कर सकें तो एक अरब लोगों को प्रति व्यक्ति 100 लीटर पानी प्रतिदिन मिल सकता है जिसका प्रयोग वे जनोपयोगी कार्यों एवं पेयजल के रूप में कर सकते हैं। अगर आसन्न गंभीर जल संकट से समय रहते नहीं निपटा गया तो एक दिन ऐसा आएगा कि धरती जल शून्य हो जाएगी। तब हमारी पीढ़ियां बूंद-दर-बूंद पानी के लिए इधर-उधर भटकेंगी और फिर भी पानी नहीं मिलेगा तो पानी के लिए हिंसा पर भी उतारू हो जाएंगी।

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कुंदन कुमार क्रांति, बीएचयू, वाराणसी

लोकपाल कब

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि वह हलफनामा देकर बताए कि लोकपाल की नियुक्ति कब तक होगी? दरअसल, 2011 में लोकपाल की नियुक्ति के लिए समाजसेवी अण्णा हजारे ने दिल्ली के रामलीला मैदान में अनशन किया था जिसे देश के लोगों का जबर्दस्त समर्थन मिला था। उसके बाद यह विधेयक संसद में पेश हुआ और 2014 में देश को लोकपाल कानून मिला। मगर लोकपाल की नियुक्ति अभी तक नहीं हो पाई है। भाजपा ने पिछले आम चुनाव से पहले देशवासियों को भरोसा दिलाया था कि वह केंद्र की सत्ता में आई तो लोकपाल कानून को सख्ती से लागू करेगी लेकिन चार साल बीत जाने के बाद भी यह मुद्दा सरकार ने ठंडे बस्ते में डाल रखा है। लग रहा है कि न तो भाजपा और न विपक्षी पार्टियों की इसमें कोई रुचि है। देश में भ्रष्टाचार को खत्म करने में लोकपाल और लोकायुक्त जैसे कानून सशक्त माध्यम बन सकते हैं। जहां एक ओर लोकपाल की नियुक्ति के बाद नेताओं की कमाई का लेखा-जोखा जनता के सामने आ सकेगी वहीं दूसरी ओर इससे ईमानदार नेताओं की छवि और निखरेगी। लिहाजा, सरकार को जल्द से जल्द लोकपाल की नियुक्ति करनी चाहिए।

पियूष कुमार, नई दिल्ली

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