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चौपाल: जल और कल, इनके साथ, अच्छी पहल

हर वर्ष भारत में प्रति व्यक्ति पानी की खपत बढ़ती जा रही है जो बीस वर्ष में दोगुनी हो जाएगी।

पूरी दुनिया में विश्व जल दिवस को 22 मार्च को मनाया जाता है। (Source: Reuters photo)

शिल्पा जैन सुराणा, वरंगल, तेलगांना

विश्व जल दिवस हर वर्ष आता है और नए संदेशों के साथ समाप्त हो जाता है। हम सब घटते हुए जल स्तर के दुष्परिणाम अच्छी तरह जानते हैं, पर फिर भी जल साक्षर नहीं बन पाए हैं। हर वर्ष गर्मी के मौसम में पानी की किल्लत आम है, लेकिन फिर भी सबक नहीं लेते। हर वर्ष भारत में प्रति व्यक्ति पानी की खपत बढ़ती जा रही है जो बीस वर्ष में दोगुनी हो जाएगी। पानी का स्तर घट रहा है लेकिन उपभोग में निरंतर वृद्धि हो रही है।
लिहाजा, जरूरी हो गया है कि हम पानी के मामले में मितव्ययी बनें। पानी की बर्बादी से बचें, हर व्यक्ति यह कोशिश करे कि वह दिन में एक बाल्टी पानी बचाएगा। प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण हम सबकी जिम्मेदारी है, एक छोटी ही सही, पर कोशिश तो करें।

प्रीति दुबे, दिल्ली विश्वविद्यालय

उत्तर-पूर्व के सात राज्य, जिन्हें ‘सेवन सिस्टर्स’ भी कहा जाता है, अपनी सुंदरता और सभ्यता के लिए खासे प्रसिद्ध हैं। लेकिन अक्सर वहां की लड़कियों को दिल्ली, मुंबई जैसे शहरों में पढ़ाई और आजीविका के लिए आने पर अन्य महिलाओं से भी अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसकी वजह से वे डर के माहौल में जीती हैं और ज्यादा घुलना-मिलना पसंद नहीं करतीं। वे छेड़छाड़ और बलात्कार जैसे जघन्य अपराध तक की शिकार बनाई जाती हैं।
हाल ही में दिल्ली के डियर पार्क और होली से एक दिन पहले पांडव नगर में पूर्वोत्तर की महिलाओं के साथ हुए अपराध के मामले क्रूर उदाहरण हैं जो एक पूरे समाज को डर में जीने के लिए मजबूर कर रहे हैं। उन्हें ‘चिंकी’ बोल कर चिढ़ाना लोगों की आदत में शुमार है। और भी अनेक प्रकार से प्रताड़ित होती ये महिलाएं अपने सपने साकार करने के लिए बड़े-बड़े शहरों में आती हैं लेकिन ‘सेवेन सिस्टर्स’ की इन लड़कियों को बहन की तरह मानना, रक्षा करना तो दूर, इंसानी नजरों से भी बहुत कम लोग देखते हैं।

चंदन दुबे, नई दिल्ली

केंद्र सरकार ने देश की जनता का स्वास्थ्य सुधारने की दिशा में अच्छी पहल करते हुए ‘फ्री हेल्थ पॉलिसी’ देने की जो घोषणा की है वह कितने ही गरीब जरूरतमंदों की जान बचा सकती है। आज देश की 80 फीसद आबादी पैसे के अभाव में उचित चिकित्सा सेवाओं से वंचित है और अनेक लोग इसीलिए असमय काल के गाल में समा जाते हैं। ऐसे में यह पॉलिसी उन करोड़ों भारतवासियों के लिए जीवनदायिनी साबित हो सकती है। पर देखना यह भी होगा कि पॉलिसी वास्तविक रूप में जमीन पर कितनी कारगर होती है। अगर कारगर नहीं होती तो यह एक जुमला भर बन कर रह जाएगी और विरोधी पार्टियों को एक और मौका मिलेगा सरकार को घेरने का।

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी बोले- "असहिष्णु भारतीयों के लिए देश में कोई स्थान नहीं, वह राज्य असभ्य जहां महिलाओं का सम्मान नहीं

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