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मतदान महादान

मतदान की अपनी जिम्मेदारी समझने वालों से ज्यादा आजकल सोशल मीडिया पर कानून-व्यवस्था, नेताओं और राजनीति को दोष देने वाले मिल जाएंगे।

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सांकेतिक फोटो।

मतदान की अपनी जिम्मेदारी समझने वालों से ज्यादा आजकल सोशल मीडिया पर कानून-व्यवस्था, नेताओं और राजनीति को दोष देने वाले मिल जाएंगे। अगर हमें लगता है कि पूरी व्यवस्था खराब है तो यह मत भूलिए कि हम भी उसी व्यवस्था का हिस्सा हैं। अगर सब खराब है, तो इसके जिम्मेदार बहुत हद तक हम स्वयं भी हैं। हम अपने क्षेत्र से अच्छे जन प्रतिनिधि चुनेंगे तो हमारे क्षेत्र का विकास कार्य अच्छा होगा। इसी तरह अगर सभी क्षेत्रों से अच्छे प्रतिनिधि चुने जाएंगे तो एक अच्छी सरकार बन सकेगी।

सभी नागरिक अपने एक वोट की कीमत समझें और अपने व देश के उज्ज्वल भविष्य के लिए अच्छी सरकार चुनें। हम सभी को जाति-धर्म के बंधन से ऊपर उठ कर चुनाव के समय दिए जाने वाले छोटे-मोटे प्रभोलनों में न फंस कर अपने कर्तव्यों को समझते हुए सही जनप्रतिनिधि का चुनाव करना होगा। अगर सही प्रतिनिधि को नहीं चुनेंगे तो सत्ता गलत हाथों में जा सकती है और प्रगति के कदम थम सकते हैं।

  • नरेश खुराना, मेरठ

मर्यादा बनाए रखें

अगले महीने से पंजाब, उत्तर प्रदेश समेत पांच राज्यों की विधानसभाओं के चुनाव होने वाले हैं। सभी राजनीतिक दल अपना पूरा जोर लगा रहे हैं। मगर उत्तर प्रदेश में स्थिति चिंताजनक है। वहां विभिन्न राजनेता संप्रदायिकता, हिंदू, मुसलिम, दलित, ओबीसी आदि के आधार पर लोगों को बांट कर वोट की राजनीति कर रहे हैं, जोकि देशहित में नहीं है। राजनेताओं द्वारा मतदाताओं को पटाने के लिए जो हथकंडे इस्तेमाल किए जाते हैं उससे देश की एकता, अखंडता, सौहार्द, भाईचारा, धर्मनिरपेक्षता आदि पर बुरा असर पड़ता है।

उत्तर प्रदेश में तो कुछ राजनीतिक दलों द्वारा कुछ क्षेत्रों में अपने अपने उम्मीदवारों की घोषणा के बाद तरह-तरह के जहरीले बयान जारी किए जा रहे हैं, जो कि दुर्भाग्यपूर्ण है। नेताओं को गरिमा, संयम, सौहार्द, भाईचारा, मर्यादा, देश की एकता तथा अखंडता तथा संविधान के मुताबिक विचारों की अभिव्यक्ति करनी चाहिए। एक-दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप या हिंसा के बदले में रोजगार, शिक्षा, आवास, गरीबी दूर करना, किसानों का हित करना, असमानता दूर करना आदि मुद्दों के आधार पर चुनाव लड़ना चाहिए।

जात पात, मंदिर मस्जिद, हिंदू मुस्लिम, ओबीसी, दलित, अयोध्या, काशी, मथुरा, गंगा, जिन्ना आदि के नाम पर मतदाताओं से वोट बटोर कर उनमें वैरभाव पैदा करना देश के लिए खतरनाक होगा। चुनाव आयोग को भी इन सब बातों पर नजर रख कर ऐसा करने वालों को न केवल चुनाव लड़ने के लिए आयोग्य घोषित करना चाहिए, बल्कि छह महीने कैद की सजा भी देनी चाहिए।
शाम लाल कौशल, रोहतक

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