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उत्तर प्रदेश सरकार- बच गई गाय, तो अब सारा ध्यान उसी पर है

भाजपा की सरकारें हैं जो स्वयं को गाय, गंगा, गीता और राम का भक्त बताती हैं।

Author June 12, 2017 5:39 AM
तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक तौर पर। (फाइल)

गाय की खातिर

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने गोवध और गो-तस्करी पर बेहद कड़ा रुख अख्तियार करते हुए इसमें शामिल लोगों के लिए कठोर दंडात्मक प्रावधानों की घोषणा की है। इन प्रावधानों में आरोपी पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून और गैंगस्टर एक्ट तक लगाने की बात कही गई है। इससे पहले भी कई राज्य सरकारों ने गोवध रोकने के लिए अपने स्तर से दंडात्मक प्रावधानों को कड़ा किया है। लगभग समूची हिंदी पट्टी, जिसे ‘काऊ बेल्ट’ भी कहा जाता है, में अब भाजपा की सरकारें हैं जो स्वयं को गाय, गंगा, गीता और राम का भक्त बताती हैं। ऐसे में गंगा-गीता को इन तीन सालों में एक तरफ रख दिया गया है। राम के मुद्दे पर न्यायालय के निर्णय की धैर्यपूर्वक प्रतीक्षा की जा रही है। बच गई गाय, तो अब सारा ध्यान उसी पर है।

सरकार दुधारू पशुओं की हत्या को रोकती है तो इसमें किसी को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए क्योंकि यह केवल धार्मिक मुद्दा नहीं है बल्कि देश की कृषि, अर्थव्यवस्था और आम आदमी के पोषण से जुड़ा हुआ मुद्दा भी है। हमारे संविधान को रास्ता दिखाने वाले राज्य के नीति निर्देशक तत्त्वों में भी दुधारू पशुओं का वध रोकने के लिए सरकार को कानून बनाने का निर्देश दिया गया है। ऐसे में गोमाता को लेकर अब तक देश में जो हुआ है, चाहे सरकारों के स्तर पर हो या सत्ताधारी दल के स्तर पर, उससे जुड़े संगठनों और समर्थकों द्वारा हो रहा है, उन सबको हम नकारात्मक श्रेणी में ही रखेंगे। सरकार वध रोकने के लिए कानून तो बनाती है मगर गोवंश के संरक्षण और संवर्द्धन के लिए अब तक कोई ठोस योजना प्रस्तुत नहीं कर पाई है।

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एक ओर जहां देश कंक्रीट के जंगल में बदल रहा है तो दूसरी ओर खेतों और खाली जमीन पर घर खड़े किए जा रहे हैं। ऐसे में गांव-गांव में सनातन काल से चली आ रही गोचारण भूमि का दायरा सिकुड़ कर बहुत कम रह गया है। हमें पश्चिमी देश स्वीडन से सीखना चाहिए जहां की पचास प्रतिशत से अधिक भूमि गो-चारण के लिए रखी गई है। भारत में इतना तो संभव नहीं है मगर सरकार कानून बना कर हर एक गांव और शहर की कुछ जमीन को गोचारण के लिए सुरक्षित कर सकती है। मुफ्त गाएं देने और गोपालकों को मुफ्त चारा देने की योजना पर अमल किया जा सकता है। सरकार गो-संरक्षण के लिए सबसे ठोस कदम उठाते हुए सरकार एक राष्ट्रीय गाय बैंक बना सकती है जहां बूढ़ी और परित्यक्त गायों को रखा जाए और उनके गोबर-मूत्र व अन्य अपशिष्टों से खाद-बिजली और औषधि आदि बनाई जा सकती है। ऐसा हुआ तो न केवल देश में पोषण का स्तर बढ़ेगा बल्कि बहुत से लोगों को रोजगार भी मिलेगा। उम्मीद है कि इस मुहिम में हिंदू-मुसलमान कंधे से कंधा मिला कर कर लगेंगे।
’अंकित दूबे, जनेवि, नई दिल्ली

 

शिक्षा का बाजारीकरण
निस्संदेह आज हमारी शिक्षा पूरी तरह बाजार में तब्दील हो चुकी है। हर कोई अधिकाधिक नंबर बटोरने की होड़ में जुटा हुआ है। शिक्षा का संबंध बस अच्छी नौकरी प्राप्त करना रह गया है। यह बहुत दुख की बात है कि आज स्कूल से लेकर कॉलेज तक में सामुदायिकता का अभाव है। आज गरीब और अमीर के लिए अलग-अलग शिक्षा है। कोचिंग सेटरों की बाढ़ नगर से गांवों तक में पैर पसार रही है। गाइडों-कुंजियों के व्यवसाय में लगे प्रकाशक मुनाफा बटोरने में लगे हैं। यह बहुत दुख और शर्म की बात है कि हमारी शिक्षा अच्छे इंजीनियर, डॉक्टर, प्रबंधक आदि तो बना रही है लेकिन अच्छे इंसान बनाने में नाकाम होती जा रही है। यही कारण है कि आज हमारे देश में बेरोजगारी, भ्रष्टाचार आदि समस्याएं बढ़ती जा रही हैं।
’रमेश शर्मा, केशव पुरम, दिल्ली

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