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विपक्षी एकता

लोकतंत्र में सरकार चलाना बेशक सत्ता पक्ष की जिम्मेवारी होती है, लेकिन सरकार के कामों पर नजर रखना विपक्ष का काम है।

विपक्षी एकता
Opposition Parliament protest: नई दिल्ली में संसद भवन परिसर में धरने के दौरान राज्यसभा से निलंबित(फोटो सोर्स: PTI)।

महात्मा गांधी के अनुसार राजनीति जनसेवा का एक माध्यम है। मगर अफसोस की बात है कि आजकल राजनीति सत्ता सिंहासन पर बैठ कर धन-संपत्ति एकत्रित करना, संविधान की अवहेलना करना, मनमर्जी से काम करना, अपने विरोधियों को परेशान करना तथा अपने विरुद्ध चल रहे मुकदमों को किसी न किसी तरह खारिज करवाना ही बन कर रह गया है।

लोकतंत्र में सरकार चलाना बेशक सत्ता पक्ष की जिम्मेवारी होती है, लेकिन सरकार के कामों पर नजर रखना विपक्ष का काम है। वर्तमान समय में सत्ताधारी भाजपा के पास प्रचंड बहुमत है, जिसके बल पर वह मनमाफिक नीतियां बनाती है, विपक्ष न केवल कमजोर, बल्कि बंटा हुआ है। ऐसे में सत्ता पक्ष मनमानी करता है। विपक्षी कांग्रेस आजकल आंतरिक कलह, कुशल नेतृत्व के अभाव के कारण सत्ता पक्ष को चुनौती देने में असमर्थ है। इसी प्रकार देश के अन्य विपक्षी दल सरकार को चुनौती देने को इकट्ठा नहीं हो पाते। सत्ता पक्ष, विपक्ष को खत्म करना चाहता है, इसलिए वह सबसे पहले विपक्ष के कभी शक्तिशाली रहे नेताओं के खिलाफ आयकर विभग, सीबीआइ, ईडी आदि से मुकदमे दर्ज करा रहा है।

इस समय देश में विभिन्न समस्याएं हैं जैसे आसमान छूती कीमतें, निरंतर बढ़ती बेकारी, भ्रष्टाचार, गरीबी आदि। सरकार लोगों का ध्यान इन समस्याओं से हटाने के लिए ईडी जैसे संगठन का प्रयोग विपक्षी दलों के खिलाफ कर रही है। संविधान की अपने ढंग से परिभाषा कर रही है। विपक्षी दल जब कभी भी सदन में लोगों से संबंधित समस्याओं को उठाने की कोशिश करता है, तो उसे ऐसा करने की अनुमति नहीं मिलती और वे लोग शोर-शराबा करते हुए या तो सदन से बाहर निकल जाते हैं या फिर उन्हें सभापति की आज्ञा का पालन न करने के कारण सदन से निलंबित कर दिया जाता है। इतना ही नहीं, प्रचंड बहुमत के सहारे सत्ता पक्ष गैर-भाजपा सरकारों को अस्थिर करने की कोशिश करता है।

विपक्ष के कुछ नेता, जिनको सत्ता पक्ष द्वारा आयकर विभाग, सीबीआइ या ईडी द्वारा परेशान किए जाने तथा जेल जाने का डर सताता है, वे मजबूरी में भाजपा में चले जाते हैं। विपक्ष की कमजोरी या अनुपस्थिति के कारण बहुत सारे विधेयक बिना बहस के ही मौखिक तौर पर पास हो जाते हैं। इन सब समस्याओं को हल करने का एकमात्र उपाय यही है कि सभी विपक्षी दल आपसी मतभेद भुला कर, संगठित होकर और केवल जनकल्याण को ध्यान में रख कर सत्ता पक्ष का सदन के अंदर तथा सदन के बाहर मुकाबला करें। कुछ दिन पहले कांग्रेस पार्टी ने देश में बढ़ती कीमतों के खिलाफ प्रदर्शन किया, लेकिन अन्य दलों ने उसका साथ नहीं दिया। अगर सभी दल मिल कर सरकार पर दबाव डालें तो जनकल्याण हेतु मिलजुल कर काम किया जा सकता है।

2024 के संसदीय चुनाव आने वाले हैं। विपक्षी दलों को अभी से मतभेद भुला कर, एकजुट होकर इन चुनावों को लड़ने की तैयारी करनी चाहिए। सफलता के लिए कुशल सत्तापक्ष तथा सशक्त विपक्ष का होना जरूरी है, ताकि सत्ता पक्ष के बहुमत होने के कारण उसकी तानाशाही को रोका जा सके।
शाम लाल कौशल, रोहतक

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