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अजहर पर शिकंजा

मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित करने के लिए संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा समिति के सदस्य देशों अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस लगातार कोशिश कर रहे थे, लेकिन बार-बार चीन इस पर वीटो लगा दे रहा था।

India, Pakistan, Jaish-e-Mohammed, Masood Azhar, well, Indian Air force, terror camp, air strike,मसूद अजहर। फोटोः इंडियन एक्सप्रेस

भारत के हर शहीद जवान के लिए प्रत्येक भारतीय के सीने में जो आग धधक रही थी, उसे थोड़ी राहत मिली है। हाल ही में पुलवामा में सीआरपीएफ के चालीस जवानों को मार दिया गया था। इस घटना के बाद पूरा देश तिलमिलाया हुआ था कि आतंकी मसूद अजहर को शिंकजे में लाया जाए। आखिरकार भारत अपनी इस कूटनीति में कामयाब हुआ और संयुक्त राष्ट्र ने आतंकी मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित कर दिया है। मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित करने के लिए संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा समिति के सदस्य देशों अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस लगातार कोशिश कर रहे थे, लेकिन बार-बार चीन इस पर वीटो लगा दे रहा था। लेकिन अब उसने अंतराष्ट्रीय दबाव पड़ने के बाद इस बार वीटो नहीं किया और मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित करने में साथ खड़ा हुआ। अगर इसे एक सियासी नजरिए से देखा जाए तो चुनाव के समय में आतंकवाद पर इतनी बड़ी करवाई कहीं न कहीं प्रधानमंत्री के पक्ष में है। अब उम्मीद की जानी चाहिए कि आतंकवाद के खिलाफ जंग में भी चीन और अमेरिका भारत का इसी तरह संथईन करेंगे और पाकिस्तान पर दबाव बनाएंगे ताकि वह वांछित अपराधियों को भारत के हवाले करे।

’शिवानी पटेल, कानपुर

वंशवाद से मुक्ति
आज भारतीय राजनीति की सबसे बड़ी विडंबना यही है कि यहां राजनीति में आने का मकसद जन समस्याओं का समाधान या देशहित नहीं, बल्कि अकूत धन संचय और अपने को समाज के एक आम नागरिक, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों से भी बहुत ज्यादा शक्ति-संपन्न बनाना भी है। भारत में नेताओं को बहुत ही ठाठबाट, ठसक और जेड सुरक्षा के साथ ऐश्वर्यशाली जीवन जीने की आदत पड़ गई है। इसलिए यहां कुछ अपवादों को छोड़ दें तो लगभग सभी राजनीतिक दलों के नेता अपने परिवार को राजनीति जैसे ‘व्यवसाय’ में लाना चाहते हैं। भारतीय राजनीति का एक दुखद पहलू यह भी है कि 1947 के स्वतंत्रता संग्राम में जो राजा-रजवाड़े इस देश के खिलाफ अंग्रेजों का साथ दे रहे थे, वे सभी आज सांसद, विधायक, मंत्री, मुख्यमंत्री और राज्यपाल आदि पदों पर बैठ कर इस देश के कथित नियंता बने हुए हैं। चूंकि यहां की जनता अधिकांशत: अशिक्षित है और जाति, धर्म जैसे खांचों में बंटी हुई है, इसलिए फिलहाल भारतीय राजनीति से ‘परिवारवाद’ की बुराई समाप्त होने की उम्मीद कम ही है। फिर भी जनता जैसे-जैसे जागरूक होती जाएगी, वही इस वंशवाद और परिवारवाद की बुराई का शमन भी करेगी ।
’निर्मल कुमार शर्मा, गाजियाबाद

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