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चौपालः विश्वसनीयता का तकाजा

सत्ताधारी या विपक्षी दलों के कार्यों, नीतियों कि आलोचना, सराहना करना मीडिया की जिम्मेदारी है, न कि एकतरफा किसी के पक्ष में खबरें दिखा कर या दुष्प्रचार करके अपनी ही विश्वसनीयता और छवि पर चोट पहुंचाना।

बॉलीवुड के चौंतीस दिग्गज फिल्म निमार्ताओं ने कुछ टीवी चैनलों के खिलाफ शिकायत दर्ज की है।

हाल ही में बॉलीवुड के चौंतीस दिग्गज फिल्म निमार्ताओं ने कुछ टीवी चैनलों के खिलाफ शिकायत दर्ज की है। उनका कहना है कि मीडिया में बॉलीवुड के खिलाफ एकतरफा दुष्प्रचार किया जा रहा है। मीडिया को देश का चौथा स्तंभ माना जाता है। कोई भी खबर या घटना हो, आम जनता तक उसको पहुंचाने का काम सबसे पहले मीडिया ही करती है। लोगों को उनके अधिकार के प्रति जागरूक करना मीडिया का काम है।

मीडिया के खबरों पर आम जनता आंखे बंद करके भरोसा करती है। प्रिंट मीडिया में ये मूल्य कुछ हद बचे दिखते हैं। लेकिन टीवी मीडिया के एक बड़े हिस्से ने जो रुख अख्तियार कर लिया है, उससे उसकी भूमिका भी संदेह के घेरे में आ गई है। विश्वसनीयता और जिम्मेदारी का अभाव देखने मिल रहा है। देश के मुख्य मुद्दों को दरकिनार कर मसालेदार खबरों को दिखाना वर्तमान में चलन बन चुका है।

देश में बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, चौपट अर्थव्यवस्था आदि मुख्य मुद्दे हैं। ये सभी देशहित और आम जनता से जुड़े हैं। ऐसे ज्वलंत मुद्दों पर बहस करना, समाधान निकालना छोड़ कर कुछ टीवी चैनल अनावश्यक खबरों को सनसनी बना कर पेश करते हैं, आक्रामकता दिखाते हैं, उससे साफ है कि उनका मकसद जनता का हित नहीं है। बल्कि कई बार ऐसी खबरों को सनसनी बना कर दिखाया जाता है, जिनसे हिंसा भड़कने कि आशंका रहती है।

सत्ताधारी या विपक्षी दलों के कार्यों, नीतियों कि आलोचना, सराहना करना मीडिया की जिम्मेदारी है, न कि एकतरफा किसी के पक्ष में खबरें दिखा कर या दुष्प्रचार करके अपनी ही विश्वसनीयता और छवि पर चोट पहुंचाना। यह बेवजह नहीं है कि देश के आम लोगों का विश्वास टीवी मीडिया से उठता जा रहा है। किसी देश, समाज और लोकतंत्र में मीडिया कि भूमिका सत्य एवं सर्वोच्च होनी चाहिए। वर्तमान समय में मीडिया को अपनी अस्मिता बरकरार रखने की जरूरत है।
’अमित पांडेय, बिलासपुर, छत्तीसगढ़

नुकसान में फायदा
फिलहाल सोशल मीडिया के हर प्लेटफार्म पर ‘तनिष्क’ का बहिष्कार चल रहा है। वजह यह है कि एक विज्ञापन में अपने आभूषणों के प्रचार के लिए सांप्रदायिक सद्भाव के एक दृश्य को आधार बनाया गया था। लेकिन इस विज्ञापन का ऐसा विरोध हुआ कि ‘तनिष्क’ को इसे हटाना पड़ गया। देश किन स्थितियों में है, इसका अंदाजा हम इससे लगा सकते हैं। कुछ लोग एक विज्ञापन तक को बर्दाश्त करने को तैयार नहीं हैं। हम समझ सकते हैं कि समाज में किस तरह से नफरत भरी हुई है और दिन-प्रतिदिन ये बढ़ती ही जा रही है। सिर्फ माचिस की एक तीली की जरूरत होती है और आग दहकने लगती है।

लेकिन इस विज्ञापन में ऐसा कुछ नहीं था, जिसका विरोध हो, फिर भी विरोध हुआ। इस विरोध से ‘तनिष्क’ को फायदा हुआ या नुकसान? मेरा मानना है कि ‘तनिष्क’ को बहुत फायदा हुआ इस विज्ञापन की वजह से। किसी चीज का इस रूप में जितना विरोध होता है, वह चीज उतनी ही लोकप्रिय भी हो जाती है। हममें से बहुत लोग ‘तनिष्क’ का नाम भी पहली बार सुन रहे होंगे और अभी इसलिए सुन पा रहे हैं, क्योंकि उसका बहिष्कार हो रहा है। बहुत सारे लोगों के दिमाग में यह ब्रांड बैठ गया होगा। अब अगली बार ‘तनिष्क’ के आभूषणों की बिक्री में उफान आए तो हैरान होने की बात नहीं होगी।
’अभिजीत मेहरा, गोड्डा, झारखंड

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