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चौपाल: जुर्माने के सिवा

सरकार खुद यह तय करे कि उसे क्या करना है। इतने सारे नेता और मंत्री मास्क और सामाजिक दूरी का पालन नहीं करते दिखते हैं, लेकिन किसका चालान कटा?

corona, maskकोरोना वैक्सीन लेने के बाद भी मास्क लगाना जरूरी है।

भारत में महामारी के दस्तक देने के बाद से सरकार ने मानो राजकोष में हुए घाटे को जुर्माने से ही भरना तय कर लिया हो। पूर्णबंदी के दौरान की बात हो या मौजूदा समय की, जिधर भी नजर डाली जाए, कहीं गाड़ी का चालान तो कहीं मास्क पर भारी-भरकम जुर्माना। एक गरीब अपने परिवार के व्यक्ति को दो वक्त की रोटी का जुगाड़ करने में सुबह से शाम हो जाती है। वहीं जरा धोखे से भी मास्क चेहरे से खिसका और पकड़ा गया तो उसे दो हजार रुपए जुर्माना कर दिया जाता है।

सवाल है कि जिसने मुश्किल से पांच सौ रुपए कमाए हो, वह दो हजार रुपए कहां से देगा। सरकार को अगर लोगों को मास्क पहनने और सामाजिक दूरी को बनाए रखने के लिए मजबूर करना है, तो इसके लिए जुर्माना तय कर देने से कुछ बड़ा बदलाव नहीं देखने को मिलेगा। सरकार खुद यह तय करे कि उसे क्या करना है। इतने सारे नेता और मंत्री मास्क और सामाजिक दूरी का पालन नहीं करते दिखते हैं, लेकिन किसका चालान कटा? जो लोग सड़क पर आम लोगों को जुर्माना देने पर मजबूर करते हैं, वे बिना मास्क वाले नेताओं के सुरक्षाकर्मी के रूप में देखे जाते हैं।

कानून बनाने वाले तो मानो इससे परे हैं। हमेशा तलवार गरीब, बेसहारा और रोजमर्रा के काम में लगे कामगारों पर ही गिरती है। हर मर्ज की दवा जुर्माना नहीं होती। सरकार ऐसी बातों से जनता को भरमाने का काम न करे। अगर सच में सरकार चाहती है कि उसके प्रदेश और केंद्र शासित प्रदेश का नागरिक सुरक्षित रहे, तो उसे जागरूक करे।
’अमन जायसवाल, दिल्ली विवि, दिल्ली

नया खतरा
पूरा विश्व कोरोना महामारी के संकट से अब तक नहीं उबर पाया है। ऐसे में एक और खतरा मंडराता नजर आ रहा है। विश्व भर के सभी देश अपनी ओर से इस महामारी की समस्या से निजात पाने की भरपूर कोशिश में लगे हुए हैं, लेकिन सफलता किसी के हाथ नहीं लगी है। संक्रमित मरीजों के आंकड़ों में अब इजाफा हो रहा है।

ब्रिटेन में पाए गए वायरस के नए स्ट्रेन से लोगों के बीच डर का माहौल बन गया है। इसके रूप में निरंतर परिवर्तन होता रहता है। इससे पहले भी इस वायरस में बीस से अधिक बार बदलाव हुए हैं। ब्रिटेन में मौजूद इस स्ट्रेन को संक्रमण के लिहाज से ज्यादा खतरनाक इसलिए बताया जा रहा है कि इसके आठ रूप जीन को बढ़ा देते हैं, जो शरीर पर खतरनाक प्रभाव डालता है। ऐसे परिस्थिति में हमारी सुरक्षा हमारे हाथों में ही है।
’निशा कश्यप, हरीनगर आश्रम, नई दिल्ली

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