त्रासद दौर

अब बहुत ही मुश्किल शब्दों से यह कहने पर मजबूर किया है कि अफगानिस्तान पर तालिबान का हमला और काबुल हवाई अड्डा भी तालिबान के शिकंजे में आ चुका है।

सांकेतिक फोटो।

अब बहुत ही मुश्किल शब्दों से यह कहने पर मजबूर किया है कि अफगानिस्तान पर तालिबान का हमला और काबुल हवाई अड्डा भी तालिबान के शिकंजे में आ चुका है। पलक झपकते ही मानो अफगानिस्तान के नागरिकों पर एक बड़ी मुश्किल आ गई है। अब तक जो देखने में आया है, उसके मद्देनजर कहा जा सकता है कि बहुत मशक्कत के बाद भी शायद अब कुछ राह दिखाई दे। मासूम बच्चों के सामने इस तरह का दुखदायी नजारा उन्हें कैसा भविष्य देगा, यह समझा जा सकता है। बच्चों के सामने बंदूक की गोलियों की आवाजें और आतंक के दृश्य बिखरे पड़े हैं। हमले, लड़ाई और मारपीट, न जाने क्या-क्या सबको दिखाई दे रहे हैं।

इस सबका बुरा प्रभाव माता-पिता के साथ उनके मासूम बच्चों पर भी दिखाई दे रहा है। तालिबान का इस तरह अपना असली रूप दिखाना वर्तमान दौर में न सिर्फ पड़ोसी देश के लिए, बल्कि सभी देश के लिए एक चिंता पैदा करने वाला माहौल है। बंदूक की नोंक पर रख कर तालिबान अपनी क्रूरता के उदाहरण रख चुके हैं। लोगों को आजादी से दूर रहने पर विवश किया जा रहा है। परिणाम आगे जो भी हो, यह बेहद शर्मनाक बात है कि इंसानों के समूह ही दूसरे इंसान को मारने की कोशिश कर रहा है, लोगों को अपने परिवारों से दूर किया जा रहा है। सच यह है कि बेहद दर्दनाक दौर अफगानिस्तान के नागरिकों के सामने है और वे उससे जूझ रहे हैं।
’सृष्टि मौर्य, फरीदाबाद, हरियाणा

लापरवाही का हासिल

‘बढ़ता खतरा’ (संपादकीय, 31 अगस्त) महामारी के फिर से सिर उठाते खतरों से आगाह करता लगा। यह बड़े अफसोस का विषय है कि जब संकट का दौर आता है तब लोग जरूरत के अधिक सजगता दिखाते हैं, मगर थोड़ा-सा खतरा टलते ही फिर उसी लापरवाही के दौर में लौट आते हैं। अभी दूसरी लहर खत्म ही नहीं हुई हैं और फिर मरीज बढ़ने लगे हैं।

ऐसे में तीसरी लहर की? कौन-सी अलग से आहट होगी? लोग पर्यटक स्थलों, पहाड़ी और धार्मिक स्थलों की लापरवाह होकर बड़े मजे से सैर कर रहे हैं। न मास्क, न सामाजिक दूरी की कोई चिंता उन्हें समझ आती हैं। अभी हमारा टीकाकरण पंद्रह फीसद  ही हो पाया है। ऐसे में लापरवाही का यह आलम क्या गुल खिलाएगा? ऐसा लगता है कि लोग महामारी के तीसरे दौर के चरम का ही इंतजार रहे हैं। सामने खड़े संकट से लड़ने का आत्मबल तभी काम आएगा जब आबादी दिशानिर्देशों का पालन करेगी। आज देश को टीके के अधिक उत्पादन और ज्यादा से ज्यादा टीकाकरण की जरूरत हैं, जो हमें महामारी की मार से बचाए।
’अमृतलाल मारू ‘रवि’, दसई, मप्र

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