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सोच-समझ कर करें फैसला

आदरणीय मनोहर जी, कल हरियाणा इंडस्ट्री पर बिजली विभाग के छापे और रणजीत चौटाला साहब का प्रेस वार्तालाप सुनने के बाद आपको खुला पत्र लिखने का मन बनाया।

mumbai, chinaतस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है। (Indian Express)।

आदरणीय मनोहर जी, कल हरियाणा इंडस्ट्री पर बिजली विभाग के छापे और रणजीत चौटाला साहब का प्रेस वार्तालाप सुनने के बाद आपको खुला पत्र लिखने का मन बनाया। सबसे पहले आपको बधाई कि हरियाणा प्रदेश, देश में जीएसटी संग्रह में दूसरे स्थान पर है। आपने, हरियाणा के हर क्षेत्र में अपने हाथों से काम कर, अनुभव कर सीखा, श्रमजीवी पहचान बनाई और उसी राज्य के मुख्यमंत्री बन कर राज्य के कर्मठ युवा के लिए उदाहरण रचा है, आपसे क्या छिपा है।

जो अपने आप को राजनीति का धुरंधर पंडित और आपको नौसिखिया बताते हैं, उनको मेरा एक ही जवाब होता है- ऐसा सीएम बताएं, जो कपड़े को छूकर उसकी पहचान बता देता हो। जो जानता हो कि खड्डी पर धागे घूमते हैं, तो मिल मालिकों को कपड़ा-लत्ता किस भाव बैठता है और जब गज के भाव दुकानों पर बिकता है, तो दुकानदार को क्या कमा कर देता है।

एक नजर में लोहे की पहचान कि स्क्रैप, बरफी बनेगी कि लेथ पर चढ़ घरों मे लगेगा। जो मुख्यमंत्री कच्चे-पक्के बिल भुगतान के बारे जानता हो, उसे सारे अर्थ और शास्त्र पता हैं। आपकी निंदा का वे जवाब नहीं देते, न ही अन्य पहले रहे मुख्यमंत्रियों जैसा तिलमिला जाते हैं, तो वह मनहोर जी की क्षमता है। पर वही पुरानी कहानी, जो सही मायने में देश चलाना जानते हैं, या तो उबर टैक्सी चला रहे हैं या कागज कारे कर अखबार।

बहरहाल, एक वृत्तांत लिख कर अपनी बात खत्म करता हूं। अमेरिका में जब राष्ट्रपति रेगन के रेगनोमिक्स वाले अर्थशास्त्र के चलते हवाई जहाज कंपनियों पर सरकारी शिकंजा कसा, तो सारी कंपनियों ने मिल कर, फॉर्चून 500 नामक पत्रिका में एक विज्ञापन निकाल कर अपनी सरकार को बताया- ईसा पूर्व सातवीं शताब्दी में चीन पर मिंग डाइनेस्टी राज करती थी। इतने प्रगतिशील लोग थे कि इतिहास साक्षी है, पांच चीनी लकड़ी से बनी और चप्पू से चलती कश्तियों पर सवार चीनीयों ने अफ्रीका खोज लिया था। चिंग डाइनेस्टी का राज आया और उसने प्रगतिशील सोच पर दंड लगा दिया। फलस्वरूप, चीन ने सारी दुनिया पर अपने परचम लहराने का मौका हमेशा हमेशा के लिए खो दिया। रेगन सरकार बात बात में छिपी बात पहचान गई और प्रस्तावित प्रतिबंध हटा लिए गए।

आज हरियाणा में एक सोची-समझी रणनीति के तहत पूंजीपतियों को बदनाम और किसानों को भड़काने का काम बड़े जोरों से चल रहा है। कौन नहीं जानता, धरतीपुत्र कहलाने वाले देवीलाल का परिवार, कभी इधर से तो कभी जेल से, चाहे आपसी पारिवारिक लड़ाई क्यों न हो, सिर्फ और सिर्फ देवीलाल की धरतीपुत्र वाली छवि पाने की दौड़ में हैं। किसी तरह हमें अपने पिता, दादा, पड़दादा वाला मान-सम्मान मिल जाए। चाहे ट्रैक्टर पर बैठ इस्तीफा ही क्यों न देना पड़े।

चाहे धरतीपुत्रों के जन्म-जन्मांतर से शत्रु, पूंजीवादी लोगों पर छापे डाल, देवीलाल के रेड राज की याद ताजा क्यों न करवानी पड़े। आपने बिल्कुल ठीक सोचा, ऐसा हो ही नहीं सकता। सब आपके अख्तियार में है, मानता हूं। पर एक बात आप मेरी भी मानें, आम लोगों में आम राय है- आप भोले हैं। आपके साथ करनाल, पानीपत, चंडीगढ़ में काम कर एक बात सीखी है कि आम लोगों की आवाज रब की आव़ाज होती है। यकीन मानिए, आप तक आम लोगों की ही आवाज पहुंचे, मैं उसी चेष्टा में लिख रहा हंू। कल के छापों के बाद दो ही चर्चाएं गर्म हैं।

एक, धरने-प्रदर्शनों को तूल देते लोग कह रहे हैं, इब बनेगी बात, अंबानी अडानी को तो भाई चौटाले ठीक कर सकें। और दो, जो बेचारे, अभी तक अपने आप को, आपके सीएम बनने से पहले शरणार्थियों की श्रेणी में गिनते थे, कह रहे थे, हमारे खट्टर साहब को भी अब फडणवीस की तरह धोखा देने की तैयारी शुरू है। फडणवीस भी पवार परिवार की आंतरिक राजनीति का शिकार हो गए थे। पवार अपने ऊपर घोटाले के दर्ज केस भी माफ करवा गए और सरकार भी गिरा गए।

पर शायद सीएम बन अब आपको समझा दिया हो, कुछ तो लोग कहेंगे, लोगों का काम है कहना। विनम्रता और आदर सहित निवेदन है कि सारे मामले को बड़ी बारीकी से देख कर अगला सरकारी फैसला करें। ऐसा न हो कि जिस इंडस्ट्री ने हरियाणा को पूरा जीएसटी इकट्ठा कर दिया हो, कहीं उसी इंडस्ट्री पर भोलेपन में, अनदेखी में, अगर प्रतिद्वंदी की मानें तो नौसिखिएपन में, बजाय प्रमाणपत्र देने के, बिजली चोरी के केस दर्ज हो गए, तो एक बात तय है, हरियाणा की अगली जीसटी कलेक्शन बहुत कम होगी।
’विक्रम जीत, चंडीगढ़

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