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चौपाल : साइबर खतरा

आज डेटा या ब्योरों या विवरण की चोरी के माध्यम से चोर हमारी निजी जिंदगी को तो तबाह करता ही है, वहीं अति-संवेदनशील डेटा की चोरी से राष्ट्रहित भी प्रभावित होता है। इस कारण हमें इस चोरी को रोकने के लिए साधनों के बेहतर प्रयोग को अपनाना होगा। बैंक से कारोबार करने के समय सावधानी की सख्त जरूरत है।

Author Updated: October 31, 2020 5:59 AM
साइबर अपराध से बढ़ी परेशानी।

आज के इस डिजिटल दुनिया में डिजिटल सेंधमारी आम बात जैसी सुनने को मिल रही है। इसका दायरा इतना बड़ा है कि तुरंत ही इस पर लोगों को जागरूक होने की जरूरत है। इसमेँ सबसे अहम मामला निजता एवं राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है, जिस पर पैनी निगाह रखने की जरूरत है। इस चोरी के करतब दिखाने में सीधी चोरी के अलावा साइबर चोर किसी ऐप, इंटरनेट लिंक या मैसेज आदि से जानकारी इकट्ठा कर यह कृत्य कर सकते हैं। चोर अक्सर बडी कंपनियों के डेटा एप, सोशल मीडिया प्लेटफार्म और सर्विस कंपनियों की वेबसाइट पर हमला कर प्राप्त करते हैं। इस चोरी का आभास हमें तुरंत नहीं मिलता है। जब मिलता है तो काफी देर हो चुकी होती है।

डेटा या ब्योरों या विवरण की चोरी के माध्यम से चोर हमारी निजी जिंदगी को तो तबाह करता ही है, वहीं अति-संवेदनशील डेटा की चोरी से राष्ट्रहित भी प्रभावित होता है। इस कारण हमें इस चोरी को रोकने के लिए साधनों के बेहतर प्रयोग को अपनाना होगा। बैंक से कारोबार करने के समय सावधानी की सख्त जरूरत है। डेटा चोरी में स्मार्टफोन एक अहम कड़ी है। स्मार्टफोन में तमाम लोगों के फोन नंबर, स्थान, जरूरी दस्तावेज, ब्योरे, मैसेज, वीडियो और फोटो के जरिए संवेदनशील डेटा होता है, जिसमें अगर चोरों की सेंध लग गई तो कई तरह के खतरे उत्पन्न होते हैं।

इस साइबर प्रहार से हमारी निजता पर लगातार खतरा बढ़ रहा है और राष्ट्रीय सुरक्षा पर भी अक्सर भय के बादल मंडराते देखे जा रहे हैं। इस कारण हमें डेटा चोरी के बचाव पर ध्यान देते हुए स्मार्टफोन का इस्तेमाल करना चाहिए। यह वक्त की जरूरत है, क्योंकि साइबर हमले दिन-प्रतिदिन बढ़ते जा रहे हैं और सरकारी प्रयास मे वह चौकसी नहीं दिखती है, जितनी जरूरत है। जबकि नागरिकों की निजता से लेकर राष्ट्रीय गोपनीयता तक की सुरक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है। अपने स्तर पर प्रशिक्षण हासिल करना और सावधानी बरतना तो जरूरी है ही।
’अशोक, पटना, बिहार

भ्रष्टाचार के विरुद्ध

टदेश के मशहूर वकील नानी पालकीवाली ने एक बार कहा था कि भारत एक समृद्ध देश है, लेकिन यहां की जनता गरीब है। अफसोस की बात यह है कि यह कथन आज भी प्रसांगिक बना हुआ है। कहा जा सकता है कि भारत ने विगत वर्षों में आर्थिक स्तर पर व्यापक विकास किया है, लेकिन एक कटु सत्य है कि बढ़ते भ्रष्टाचार ने देश को गरीबी के गर्त में और धकेला है। भारत एक लोकतांत्रिक देश है, जहां सरकारें व्यापक स्तर पर कल्याणकारी योजनाओं को लागू करती हैं।

लेकिन इन योजनाओं को सफल बनाने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका सरकारी संस्थानों की होती है और इनमें बैठी नौकरशाही इसका संचालन करती है। अफसोसजनक स्थिति यह है कि भ्रष्टाचार की गिरफ्त में आए लोग ही भ्रष्टाचार को दूर करने के लिए काम में लगाए गए हैं। भारत जैसे देश में भ्रष्टाचार के लिए कई कारण जिम्मेदार हैं। मसलन, प्रशासन में पारदर्शिता, जवाबदेही, निष्पक्षता, संवेदनशीलता आदि गुणों का क्षरण होना दूसरा कारण है।

राजनीतिक और प्रशासनिक, दोनों ही स्तर पर व्यापक भ्रष्टाचार तीसरा कारण है। केंद्र्रीकृत प्रणाली का दिन-प्रतिदिन विस्तार होना और भ्रष्टाचार के लिए बनाए गए कानूनों के लागू होने में ढीलापन अन्य महत्त्वपूर्ण कारण हैं। इसके अलावा, नागरिक और सरकारी कर्मचारियों, दोनों के ही द्वारा कानूनों का अनुपालन नहीं होना भी भ्रष्टाचार को बढ़ावा देता है।

अब वक्त आ गया है कि सरकारों को भ्रष्टाचार पर नकेल कसने के लिए व्यापक स्तर पर मंथन करना चाहिए और इससे संबंधित कानूनों का फिर से निरीक्षण करना चाहिए। सरकार पहला कदम उठाए कि भ्रष्टाचार की रोकथाम के लिए बने कानूनों को सख्ती से लागू करवाए। दूसरा उपाय यह हो कि आरटीआइ कानून में जरूरी सुधार करके इसे और मजबूत बनाया जाए और इसके उपयोग को बढ़ावा दिया जाए। कुछ दुरुपयोग हो सकता है, लेकिन यह कानून अपने आप में भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने का सबसे बड़ा हथियार साबित हो सकता है।

सरकारी संस्थाओं का राजनीतिकरण नहीं होने देना सबसे जरूरी है, ताकि वे भ्रष्टाचारियों को संरक्षण और भ्रष्टाचार को बढ़ावा न दे सकें। फिर शिकायतों से संबंधित जटिल नियमों को और सरल बनाने की जरूरत है, ताकि आमजन भ्रष्टाचार के खिलाफ शिकायत करने में सहज महसूस करे।
’सौरव बुंदेला, भोपाल, मप्र

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