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चौपालः महंगाई का र्इंधन

पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों से आम आदमी का दैनिक जीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।

Author October 3, 2018 2:41 AM
जब तक केंद्र और राज्य सरकारें इस मोटी कमाई में कटौती नहीं करेंगी, तेल की कीमतें ऊंची बनी रहेंगी।

पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों से आम आदमी का दैनिक जीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। खेती-किसानी का भट्ठा तो बैठ ही रहा है, ट्रकों से माल ढुलाई का बजट भी बिगड़ गया है। देश में करीब 86 फीसद माल ढुलाई ट्रकों से की जाती है। ढुलाई के बढ़ते खर्चों से महंगाई आसमान छू रही है, जिससे अर्थव्यवस्था की नींव कमजोर हो रही है। कच्चे तेल के दाम में प्रति बैरल दस डॉलर की बढ़ोतरी होने पर भारत का राजस्व घाटा जीडीपी के 0.4 प्रतिशत के बराबर बढ़ता है और वृद्धि दर को कमजोर करता है। इस सबके बीच पक्ष-विपक्ष आरोप-प्रत्यारोप में व्यस्त हैं।

भारत अपनी जरूरत का 80 फीसद तेल आयात करता है। जुलाई 2018 में भारत के कच्चे तेल का आयात शुल्क 10.2 अरब डॉलर था जो जुलाई 2017 की तुलना में 76 फीसद अधिक है। कच्चे तेल के आयात के मामले में भारत ईरान का दूसरा सबसे बड़ा ग्राहक है। आने वाले दिनों में ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंध की वजह से कच्चे तेल की कीमत में और इजाफा हो सकता है। नवंबर 2014 में जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें बढ़ी थीं तब से जनवरी 2016 के बीच धीरे-धीरे करके केंद्र सरकार ने पेट्रोल पर 11.77 रुपए और डीजल पर 13.47 रुपये प्रति लीटर उत्पाद शुल्क बढ़ाया था।

जनवरी 2016 के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में लगातार कमी होने के बावजूद सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क और बाकी करों में कोई कटौती नहीं की। परंपरागत रूप से पेट्रोलियम उत्पाद पर लगे कर और वैट केंद्र तथा राज्य सरकारों के लिए राजस्व का बड़ा स्रोत हैं। सरकार कच्चे तेल पर लगे उत्पाद शुल्क और वैट को छोड़कर भी बाकी करों में कटौती से कच्चे तेल के कीमतें कम कर सकती है। पेट्रोलियम उद्योग पर कर की कहानी सिर्फ उत्पाद शुल्क और वैट तक सीमित नहीं है। डीजल पर रोड सेस, पेट्रोलियम मशीनरी पर आयात शुल्क व जीएसटी, तेल कंपनियों पर कॉरपोरेट टैक्स, इनसे सरकार को मिलने वाले लाभांश पर कर और तेल खनन पर राज्यों को रॉयल्टी- ये सभी कच्चे तेल की महंगाई का हिस्सा हैं।

ऐसे में कच्चे तेल की कीमत महंगाई और रुपए की छिनती ताकत के बीच कैसे कम होगी? पेट्रोलियम उत्पादों पर कर में 36 फीसद केंद्र का और 20 फीसद राज्यों का कर राजस्व होता है। 2017-18 में केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम उत्पाद पर लगे कर से 2.84 लाख करोड़ का राजस्व हासिल किया और राज्यों ने 2.09 लाख करोड़ का। इसलिए जब तक केंद्र और राज्य सरकारें इस मोटी कमाई में कटौती नहीं करेंगी, तेल की कीमतें ऊंची बनी रहेंगी।

शुभम शर्मा, नोएडा

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