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चौपालः ठगी का जाल

यह ध्यान रखने की जरूरत है कि बैंक, वित्तीय संस्थाएं खाते का ब्योरा नहीं मांगतीं। ईमेल पर किसी को भी अकाउंट डिटेल नहीं भेजना चाहिए। अगर कुछ छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखा जाए तो ऑनलाइन ठगी से बचा जा सकता है।

Author Published on: May 22, 2020 2:11 AM
ऑनलाइन खरीदारी और लेन-देन के चक्कर में कई लोग अपनी मेहनत की कमाई खो देते हैं।

आजकल ऑनलाइन ठगी की काफी खबरें आने लगी हैं। यह सही है कि ऑनलाइन सुविधा का इस्तेमाल शुरू करते ही हम दुनिया भर से जुड़ जाते हैं। ज्ञान हासिल करने के अलावा कमाने, बचाने, जमा करने से लेकर खर्च करने तक के लिए कहीं जाने की जरूरत नहीं पड़ती। लेकिन याद रहना चाहिए कि ऑनलाइन माध्यम से आर्थिक गतिविधियों में शामिल होते हुए सावधानी जरूरी हो गई है। ऑनलाइन की पूरी व्यवस्था हमारे यहां फिलहाल जिस तरह चल रही है, उसमें ठग नए-नए तरीके खोज निकालते हैं ठगी के। सोशल मीडिया का जमाना है, तो ठग दूसरों के फेसबुक खाते हैक करके उसके जरिए लोगों के मित्रों को भावुक-सा संदेश भेज कर उधार पैसे की मांग करने लगते हैं। इस जाल में फंसने वालों को बाद में पता चलता है कि उनके मित्र ने पैसे नहीं मांगे, बल्कि किसी ने उनका खाता हैक करके उन्हें ठग लिया।

इसके अलावा, ऑनलाइन खरीदारी और लेन-देन के चक्कर में कई लोग अपनी मेहनत की कमाई खो देते हैं। ठगी के हजार तरीके निकाले जा चुके हैं और निकलते जा रहे हैं। मगर सबसे घातक है बैंक खातों और क्रेडिट कार्ड में लगने वाली चपत। इस सबसे बचने के लिए सतर्कता काफी जरूरी है। ऑनलाइन बैंकिंग के लिए मजबूत पासवर्ड बनाने की सबसे ज्यादा जरूरत होती है और उसे भी समय-समय पर बदलने की आदत डालनी चाहिए। फोन पर किसी को अपने बैंक खाते का ब्योरा नहीं देना चाहिए।

यह ध्यान रखने की जरूरत है कि बैंक, वित्तीय संस्थाएं खाते का ब्योरा नहीं मांगतीं। ईमेल पर किसी को भी अकाउंट डिटेल नहीं भेजना चाहिए। अगर कुछ छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखा जाए तो ऑनलाइन ठगी से बचा जा सकता है। हालांकि सरकार को भी ऐसे ठग तत्त्वों पर लगाम लगाने के लिए एक व्यापक तंत्र बनाना चाहिए।
-काव्यांशी मिश्रा, मैनपुरी

स्वदेशी का सपना

केंद्र सरकार ने रेहड़ी या अन्य साधनों से रोजी-रोटी चलाने वालों के लिए भी आर्थिक पैकेज में राहत देने की घोषणा की और बिना किसी गारंटी के कुल मिला कर तीन लाख करोड़ का लोन देने का प्रावधान भी किया है। लेकिन सवाल है कि जो लोग किन्हीं वजहों से अपने आप को सरकारी कागजों में दर्ज नहीं करवा सके हैं, वे सरकार की योजनाओं का लाभ कैसे ले पाएंगे? जो लोग टैक्स देने से बचने के लिए सरकारी दस्तावेजों में अपना नाम दर्ज कराने से बचते हैं, उनके बारे में क्या योजना है?

बहरहाल, प्रधानमंत्री ने देश में आत्मनिर्भरता बढ़ाने की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि ‘हमें लोकल चीजों को लेकर वोकल होना चाहिए’, यानी हमें स्वदेशी चीजों के बारे में ज्यादा बात करनी चाहिए। अगर इस पर अमल किया जाए तो इससे देश के कुटीर और लघु उद्योगों को संजीवनी मिल सकती है। देश को विदेशी मोह छोड़ कर स्वदेशी से नाता जोड़ना होगा, तभी देश आत्मनिर्भर बन सकता है। लेकिन लगभग हर क्षेत्र में विदेशी निवेश और भागीदारी बढ़ते जाने के दौर में यह कितना संभव हो पाएगा, यह देखने की बात होगी। सरकार को चाहिए की वह देश में विदेशी कारोबार के लिए सख्त कायदे-कानून बनाए।
-राजेश कुमार चौहान, जालंधर

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