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चौपाल: बदलता मौसम

जलवायु के मुताबिक एक ला नीना वर्ष में हवा सर्दियों के दौरान बहुत मजबूत होती है, जो भूमध्य रेखा के पास पानी को सामान्य से कुछ डिग्री अधिक ठंडा बनाती है। समुद्र के तापमान में यह परिवर्तन दुनिया भर के मौसम और फसलों को प्रभावित करता है।

Author Updated: October 31, 2020 5:51 AM
Weather Today Updatesतस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है। (PTI)

यह साल वास्तव में किसी परीक्षा से कम नहीं लग रहा है, जिसमें हर घड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। फिलहाल मौसम करवट बदल रहा है। ठंड का अनुभव होना शुरू हो गया है। पर खास बात यह है कि ये आमतौर पर पड़ने वाली सर्दी से ज्यादा अलग और अपेक्षया ज्यादा है। दरअसल, यह सब ला नीना की स्थितियों के कारण हो रहा है, जिसमें हवा दक्षिण अमेरिका से इंडोनेशिया तक महासागर की सतह पर पश्चिम की ओर प्रशांत महासागर के गर्म सतह के पानी को उड़ाती है। जैसे ही गर्म पानी चलता है, ठंडा पानी सतह पर आ जाता है, जिससे पूर्वी प्रशांत में पानी सामान्य से अधिक ठंडा हो जाता है।

जलवायु के मुताबिक एक ला नीना वर्ष में हवा सर्दियों के दौरान बहुत मजबूत होती है, जो भूमध्य रेखा के पास पानी को सामान्य से कुछ डिग्री अधिक ठंडा बनाती है। समुद्र के तापमान में यह परिवर्तन दुनिया भर के मौसम और फसलों को प्रभावित करता है। उम्मीद है कि इस संकट का लोग समझदारी से सामना करेंगे। खासतौर पर घर के बच्चे और बुजुर्गों को ठंड से बचाने की जरूरत है।
’गोपाल सिंह बिष्ट, अल्मोड़ा, उत्तराखंड

सचेत होने का वक्त

पिछले कुछ दिनों से जिस तरह से यूरोप में फिर से कोरोना के मरीजों की संख्या में वृद्धि देखने को मिल रही है, उससे हमें फिर से सचेत होने की जरूरत है। राहत की बात यह है कि पिछले कुछ दिनों से हमारे देश में कोरोना के नए मामलो में गिरावट और मरीजों के ठीक होने की दर में भी सुधार देखने को मिला है। लेकिन हमें यह कतई नहीं भूलना चाहिए कि हमारी लापरवाही के कारण फिर से कोविड के मामले बढ़ सकते हैं। इस समय हमारे देश में त्योहारों का मौसम चल रहा है, तो हमें इस बात का और ज्यादा खयाल रखने की जरूरत है।

त्योहारों को खूब मजे से मनाएं, लेकिन इसके साथ-साथ यह हमारी जिम्मेदारी है कि कोरोना रोकथाम के लिए जरूरी उपायों पर अच्छे से पालन हो और जरूरत पड़ने पर दूसरों को भी इसके बारे में जरूर बताते रहा जाए, ताकि सबके अपने-अपने काम भी होते रहें और हम सुरक्षित भी रहें। अगर इस समझदारी के साथ हम अपने-अपने आने वाले सभी त्योहारों को मनाएं तो इस महामारी को अपने देश में और ज्यादा पांव पसारने से रोक सकते हैं।
’शुभम गुप्ता, धनबाद, झारखंड

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