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चौपालः दरकिनार हुनर

आज पैसा और रुतबा के आगे हुनर को झुकाया जाता है। कुछ इक्के-दुक्के होते हैं, जो इस ‘नेपोटिज्म’ की दुनिया में भी अपनी सफलता का झंडा ऊंचा कर लेते हैं, मगर उन पर भी चारों तरफ से अनदेखा अनकहा दबाब बना रहता है।

अक्सर कहा जाता है कि इंसान में प्रतिभा होनी चाहिए। पर अब देखा जा रहा कि उस भाई-भतीजावाद के बीच प्रतिभा घुटने टेक देती है।

आज अधिकतर लोग, चाहे वे आज एक सफल व्यक्ति हों या फिर मंजिल के करीब हों, उन्हें कभी न कभी पक्षपात नामक ‘बीमारी’ का सामना करना ही पड़ता है। उस परिस्थिति में तो और भी ज्यादा हम भाई-भतीजावाद का शिकार बनते हैं, जब हम परिवार के विपरित क्षेत्र में अपना कॅरियर बनाना चाहते हैं। इसके कारण ही आज हर क्षेत्र में असल हुनर को नजरअंदाज कर दिया जाता है। अक्सर छोटा शहर बड़ा सपना दिखाता है और उसको पूरा करने के लिए हम जी-जान से मेहनत करते हैं। लेकिन हमें हर जगह छोटे शहर से होने का, अपमान सहना पड़ता है और लाख मेहनत के बावजूद हम इस भाई-भतीजावाद के बीच अपनी जगह नहीं बना पाते। हालांकि हर संभव प्रयास रहता उनमें ढलने का, फिर भी आमतौर पर मजाक का पात्र बनाया जाता है।

आज पैसा और रुतबा के आगे हुनर को झुकाया जाता है। कुछ इक्के-दुक्के होते हैं, जो इस ‘नेपोटिज्म’ की दुनिया में भी अपनी सफलता का झंडा ऊंचा कर लेते हैं, मगर उन पर भी चारों तरफ से अनदेखा अनकहा दबाब बना रहता है। वह इंसान दुनिया की हर शोहरत पाकर भी अवसाद से ग्रस्त रहता है। अक्सर कहा जाता है कि इंसान में प्रतिभा होनी चाहिए। पर अब देखा जा रहा कि उस भाई-भतीजावाद के बीच प्रतिभा घुटने टेक देती है। उसके बावजूद अगर किसी ने हार नहीं मानी, तो फिर आपको ‘महाभारत’ के अभिमन्यु के तरह घेरा जाएगा और पर्दे के पीछे से साजिशों का हिस्सा बनाया जाएगा। आपको अपने रास्ते से हटाने का हर संभव प्रयास किया जाएगा। इसलिए हमेशा उन लोगों की तलाश करनी चाहिए, जो अपनी प्रतिभा के बल-बूते अपना भविष्य संवारना चाहते हैं। उनका साथ देना चाहिए, उनको मंच प्रदान करना चाहिए, ताकि वे अपना हुनर दिखा सके। उनका पुरजोर बहिष्कार करना चाहिए, जो वास्तविक प्रतिभा का गला घोंट अपने भाई-भतीजावाद को चलाना चाहते हैं।
’भावना झा, बिहार

बरसात की मार
हर साल बरसात के मौसम में देश के विभिन्न राज्य बाढ़ की चपेट में आते हैं, लेकिन न तो केंद्र सरकार और न ही राज्य सरकारें इस आपदा से निपटने के लिए पहले से कमर कस के रखती हैं। मानसून बेहद जरूरी है, लेकिन यह हर साल देश के कुछ राज्यों में आफत भी बनता है। कभी-कभी तो सड़कों-गलियों में बारिश का पानी इस कदर बढ़ जाता है कि यह लोगों की जान पर भी भारी पड़ जाता है। लेकिन प्रशासन और सरकारें नींद सोई रहती हैं। मगर जब कहीं बारिश आफत बन जाती है तब जाकर सरकार मुआवजे और सांत्वना का मरहम लगा कर अगले मानसून तक लंबी तान के सो जाती है।

इसके लिए हर बार सरकारों और प्रशासन को फटकार मिलती है, लेकिन जिस देश में भ्रष्टाचार चरम पर हो, नगर निगम के भ्रष्ट अफसरों और कर्मचारियों को अपनी जिम्मेदारी का अहसास न हो, वहां बारिश आफत बनेगी ही। सीवर की साफ-सफाई और टूटी सड़कों का निरीक्षण करना नगर निगम का काम होता है। लेकिन नगर निगम के साथ अलग-अलग राज्यों की सरकार के सताधारी पार्षद और विधायक भी बारिश से पैदा होने वाली समस्याओं के लिए कम जिम्मेवार नही हैं। वे अपने-अपने क्षेत्र का नित दौरा सिर्फ वोट मांगने के समय करते हैं। इससे बेहतर है कि वे इन समस्याओं का हल निकालने के लिए नगर निगम को नींद से जगाएं! इसके अलावा, जब तक नगर निगमों में भ्रष्टाचार व्याप्त रहेगा, तब तक हर मानसून में बारिश आफत बनती रहेगी।
’राजेश कुमार चौहान, जालंधर

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