ताज़ा खबर
 

नाहक दखल

आम तौर पर कानून में संशोधन या प्रस्ताव लाने की आवश्यकता उस जगह होती है, जहां लोग अपने आप को असहज महसूस करते हों या फिर वहां किसी वजह से किसी के हितों का हनन हो रहा हो।

तस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रतीकात्मक रूप से किया गया है।

आम तौर पर कानून में संशोधन या प्रस्ताव लाने की आवश्यकता उस जगह होती है, जहां लोग अपने आप को असहज महसूस करते हों या फिर वहां किसी वजह से किसी के हितों का हनन हो रहा हो। मगर लक्षद्वीप में सब कुछ सामान्य होने और जन जीवन सुचारु रूप से चलने के बावजूद वहां नए संशोधन विधेयक के जरिए शराब पर चल रहे प्रतिबंध को हटा लिया गया। बीफ के उत्पादन पर पूरी तरह रोक लगा दी गई।

साथ ही साथ वहां गुंडा एक्ट कानून को लागू करने और तटवर्तीय इलाकों में बने मछुआरों के झोपड़ों को तोड़ने का आदेश पारित कर दिया गया। इसे लेकर राज्य में अफरातफरी का माहौल है। गौरतलब है कि अब तक लक्षद्वीप में अपराध न के बराबर रहा है। शराबबंदी की वजह से घरेलू हिंसा शून्य है। एनसीआरबी 2019 के एक सर्वे के हिसाब से लक्षद्वीप में बड़े संगीन अपराध शून्य थे। केवल एक चीज, यानी शराब पर अंकुश लगाने से प्रशासनिक व्यवस्था को दुरुस्त रखने में कितनी आसानी होती है, यह लक्षद्वीप के मॉडल से सीखना चाहिए।

लक्षद्वीप की जनसंख्या के हिसाब से वहां 96.58 फीसद मुसलिम और 2.77 फीसद अन्य समुदायों के लोग रहते हैं, जिनका मुख्य आहार बीफ है। उसके उत्पादन पर पाबंदी लगा दी गई। हालांकि इससे किसी कानून-व्यवस्था के बिगड़ने की कोई आशंका नहीं थी। इससे यहां के लोगों को सस्ते में प्रोटीनयुक्त भोजन की व्यवस्था आसानी से हो जाती थी। साथ ही वहां की अर्थव्यवस्था को भी फायदा होता था।

इसके अलावा, सबसे कम अपराध वाले इस राज्य में गुंडा एक्ट लगा दिया गया। कोरोना काल के इस समय भी आंतरिक रणनीति की ही वजह से ही लक्षद्वीप में केवल छह हजार के आसपास कोरोना संक्रमित मिले। जब कि देश के अन्य राज्य कोरोना पर रणनीति बनाने में विफल साबित हुए। अगर उसके आंतरिक नीतियों में इस तरह से फेरबदल किया गया तो यही समझा जाएगा कि वहां की संस्कृति को खत्म करने की ओर कदम बढ़ रहे हैं।

अगर हम उसकी बनावट पर ध्यान डालें तो हमें ज्ञात होता है कि भारत के दक्षिण-पश्चिम तट से 200 से 400 किलोमीटर दूर लक्षद्वीप सागर में स्थित एक द्वीप समूह है, जो अपनी खूबसूरती के लिए प्रसिद्ध है और जहां लोग अपनी छुट्टियों को यादगार बनाने के लिए पहुंचते हैं। इस द्वीप को केवल कुदरत ने प्राकृतिक सुंदरता से ही नहीं सुशोभित किया है, बल्कि वहां की खूबसूरती सामाजिक शांति और न के बराबर अपराध ने इसकी सुदंरता में चार चांद लगा दिया है। मगर केंद्र सरकार के नए प्रयोग की देन है कि अब वहां की संस्कृति पर आघात की कोशिश की जा रही है।
’मोहम्मद आसिफ, जामिया नगर, दिल्ली

डिजिटल विभाजन

वर्तमान हालात को देखते हुए परीक्षाएं रद्द करना जरूरी था, लेकिन अब शिक्षा के क्षेत्र में भी सरकार को आवश्यक चिंतन करने की जरूरत है। कई बड़े संस्थानों ने आॅनलाइन शिक्षा को विकल्प के रूप में अपनाया है, लेकिन इससे एक नई असमानता डिजिटल विभाजन के रूप में सामने आई है। कई पिछड़े तबके संसाधनों के अभाव से ग्रस्त हैं तो वहीं कई लोगों के पास जरूरी तकनीकी ज्ञान का अभाव है। ऐसे समय में तकनीक का कम ज्ञान साइबर अपराधों को भी बढ़ाता है। आॅनलाइन शिक्षा एक बड़े समूह को अभावों में ही छोड़ आगे बढ़ जाने जैसा मार्ग है।

वर्तमान परिदृश्य में शिक्षा का महत्त्व किसी से छिपा नहीं है। कई काम-धंधे बंद हो गए हैं, जिसका अधिकतम नकारात्मक प्रभाव अशिक्षित तथा मजदूर वर्ग पर ही पड़ा है। अगर इसी तरह यह डिजिटल विभाजन बना रहा और शिक्षा पर ध्यान नहीं दिया गया तो कई विद्यार्थियों का एक बेहतर भविष्य का सपना सिर्फ सपना ही रह जाएगा। यह सरकार की जिम्मेदारी है कि वह इस क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित कर विकल्प तैयार करे। समस्याएं तो रहेंगी, इसलिए उससे दूर होकर टालने के बजाय उसका समाधान ढूंढ़ना भी आवश्यक है।

आॅनलाइन शिक्षा कभी नियमित की जगह नहीं ले सकती। अब नियमित शिक्षा को कैसे सावधानी के साथ और किस तरह शुरू किया जाए, इस दिशा में सरकार को गंभीर प्रयास करने की जरूरत है। यह ध्यान रखने की जरूरत है कि डिजिटल विभाजन के जरिए बनने वाली व्यवस्था में समाज का ज्यादातर हिस्सा अन्याय और असमानता का शिकार होगा। यह रिवायत शिक्षा की व्यवस्था से शुरू होगी। इसलिए सुरक्षा के इंतजामों के साथ सरकार नियमित शिक्षण के तौर-तरीकों को चलने देने की व्यवस्था करे।
’मोहित पाण पाटीदार, धामनोद, मप्र

Next Stories
1 अच्छी पहल
2 अभिव्यक्ति पर अंकुश
3 भावी खतरा
ये पढ़ा क्या?
X