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शराबबंदी की सच्चाई

नीतीश कुमार से पहले भी कर्पूरी ठाकुर ने बिहार में शराबबंदी लागू की थी, लेकिन उसकी विफलता से बाध्य होकर शराबबंदी हटा लिया था।

शराबबंदी की सच्चाई
सांकेतिक फोटो। (इंडियन एक्सप्रेस)

बिहार में शराबबंदी के बावजूद शराब पीने से मौत का सिलसिला जारी है, सिर्फ हर बार स्थान और पीड़ित परिवार के चेहरे बदल जाते हैं। इस बार छपरा में जहरीली शराब पीने से आठ लोगों की मौत हो गई है, बारह लोगों की आंखों की रोशनी चली गई और दर्जनों लोग अस्पताल में भर्ती हैं। हर बार प्रशासन जांच का आदेश देता है, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकलता। सुशासन के दावे वाली सरकार में शराबबंदी की धज्जियां उड़ रही हैं। शराबबंदी पुलिस के लिए ऊपरी आय का जरिया बन चुका है।

नीतीश कुमार से पहले भी कर्पूरी ठाकुर ने बिहार में शराबबंदी लागू की थी, लेकिन उसकी विफलता से बाध्य होकर शराबबंदी हटा लिया था। आज बिहार के सभी पड़ोसी राज्यों में शराब की ब्रिकी हो रही है। जमीनी हकीकत को समझे बिना बनाया गया कोई भी कानून, महज एक मजाक बन कर रह जाता है।
हिमांशु शेखर, गया

दावे और हकीकत

सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी अपनी कामयाबी का बखान हर जगह करती है। बिजली, शिक्षा आदि का केजरीवाल हर जगह उल्लेख करते हैं। इसी के चलते पंजाब में उन्हें जीत मिली। अब वही बातें गुजरात की सभाओं में दोहराते हैं। दिल्ली में कांग्रेस की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित की हार के बाद भाजपा सता में आई थी। उसके बाद दो बार केजरीवाल मुख्यमंत्री बनाए गए।

दिल्ली की जनता परेशान और मौके की तलाश में है। दिल्ली में आम आदमी पार्टी की दमदार मौजूदगी कांग्रेस और भाजपा के हार का कारण बनी। केजरीवाल की बिजली-पानी की मुफ्त रेवड़ी दोनों पार्टियों को पटखनी देने में सफल हुई। शीला दीक्षित के बाद कांग्रेस ने फिर से सता का स्वाद नहीं चखा। 2007 से ही भाजपा के सितारे गर्दिश में थे। दिल्ली में भाजपा संगठित थी और कांग्रेस बंटी हुई थी। इसका फायदा उठा कर अण्णा हजारे के आंदोलन से निकले केजरीवाल ने दिल्ली की जनता को नजदीक से परख कर मुफ्त का ऐलान कर दिया।

अब केजरीवाल दिल्ली माडल और पंजाब की सरकार का बखान कर जनता से वोट मांगने निकले हैं। इस वर्ष आम आदमी पार्टी ने गुजरात मे पांच मुफ्त रेवड़ी की घोषणा की है, जिसमें हर महिला के खाते में एक हजार रुपए जमा करवाने की भी गारंटी दी है। आम आदमी पार्टी भ्रष्टाचार खत्म करने का दावा करती रहती है। पर आम आदमी के एक नेता ने चालीस करोड़ का गबन किया है। कहां गई आम आदमी की ईमानदारी? पिछले दिनों जिस जोश से आम आदमी ने विधानसभा चुनाव में प्रवेश किया था, उसके बाद पंजाब को छोड़ कर कहीं पर जीत नहीं मिली थी। विकास के साथ जनता अपने हितों की भी उतनी ही हिफाजत चाहती है। जनता को बहका कर एक बार वोट हासिल किया जा सकता है, बार-बार नहीं।
कांतिलाल मांडोत, सूरत

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