ताज़ा खबर
 

चौपालः भरोसे के स्वर

‘बाबा की बलैयां’ (संपादकीय, 27 फरवरी) में ‘संजू बाबा’ (फिल्मी कलाकार) की जेल से रिहाई पर इलेक्ट्रानिक मीडिया की भूमिका पर प्रश्नवाचक चिह्न लगाया गया है।

Author Published on: March 4, 2016 2:59 AM
प्रतीकात्मक तस्वीर

‘बाबा की बलैयां’ (संपादकीय, 27 फरवरी) में ‘संजू बाबा’ (फिल्मी कलाकार) की जेल से रिहाई पर इलेक्ट्रानिक मीडिया की भूमिका पर प्रश्नवाचक चिह्न लगाया गया है। बेशक समस्त सस्थागतों में त्रुटियां-कमियां होती रहती हैं और वे परस्पर एक दूसरे की कमियां निकालती रहती हैं। इसी प्रकार लोकतंत्र के चौथे खंभे मीडिया पर भी शेष तीनों स्तंभों (न्यायपालिका, विधायिका और कार्यपालिका) द्वारा आरोप-प्रत्यारोप किए जाते रहते हैं। लेकिन बात जब स्वयं तंत्र के अंदर से ही निकलती है, तब उसकी सामयिकता महत्त्व और वजन ज्यादा प्रभावशाली हो जाते हैं।
जब एक तंत्र दूसरे तंत्र के गुणों के आधार पर उसकी कमी बताते हुए उसकी आलोचना-समालोचना या प्रति-आलोचना करता है, तब संपूर्ण तंत्र अपने अस्तित्व की आशंका से ग्रसित होकर अपने अस्तित्व को बचाने के लिए उस आलोचना को नजरअंदाज करते हुए आरोप लगाने वाले दूसरे तंत्र पर ही प्रत्यारोप लगाने लगता है। इस प्रक्रिया में मूल प्रश्न एक तरफ रखा रह जाता है। खासकर मीडिया के मामले में तो यह एक बेहद कठिन काम होता है, जहां उसकी भूमिका पर प्रश्न उठाना हर किसी के वश की बात नहीं होती है। वह इसलिए चूंकि ‘मीडिया’ ही एकमात्र वह साधन या धरातल है जो आज सभी तंत्रों की आलोचनाओं-समालोचनाओं को जगह देकर प्रकाशित करता है, जिसे आम जनता पढ़ती, देखती और सुनती है।
पूर्व में मीडिया का मतलब केवल समाचार पत्र और आकाशवाणी को माना जाता था। लेकिन कालांतर में प्रिंट मीडिया के साथ इलेक्ट्रॉनिक मीडिया भी जुड़ गया, जिसने एक समय तो प्रिट मीडिया को लगभग किनारे ही कर दिया था। फिर इक्कीसवीं सदी में सोशल मीडिया आ गया, जिसने एक तरह से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर कुछ अंकुश लगाने का प्रयास किया। इन परिस्थितियों में जब मीडिया के अंदर से कोई आवाज उठती है या उठी है, तो उसकी वैधता को चुनौती कम से कम उसे पढ़ने या देखने वाला पाठक नहीं देता है। केवल मीडिया के अंदर के दूसरे लोग ही प्रतिस्पर्धा की भावना से उस पर ऐसे आरोप लगा सकते हैं। इसलिए इस संपादकीय में अगर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को गैरजिम्मेदार ठहराते हुए उसके कृत्य और अति पर सार्थक रूप से प्रश्नवाचक चिह्न उठाया गया है तो इस साहस की प्रशंसा की जानी चाहिए।
’राजीव खंडेलवाल, सिविल लाइंस, दिल्ली

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

X
Next Stories
ये पढ़ा क्या?
X