ताज़ा खबर
 

चौपाल: फैसले के बाद

सुप्रीम कोर्ट ने स्थिति साफ कर दी, लेकिन क्या यह पुरुष प्रधान समाज इसे स्वीकार करेगा? क्या बेटियां अपने पिता से अपनी संपत्ति मांग पाएंगी और क्या उनके पिता उन्हें अपनी संपत्ति में हिस्सा देंगे?

Supreme Court, Propertyसुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं के हक में एक बड़ा फैसला दिया है।

‘बेटी का हक’ (संपादकीय, 13 अगस्त) पढ़ा। सुप्रीम कोर्ट ने 2005 के हिंदू उत्तराधिकार कानून में संशोधन पर एक महत्त्वपूर्ण आदेश दिया, जिसमें बेटियों को भी उसके पिता की संपत्ति में बराबर हक दिया जाएगा, चाहे उसके पिता की मृत्यु सितंबर 2005 से पहले ही क्यों न हो गई हो। यह निश्चित ही अच्छा फैसला है। लेकिन क्या इस फैसले का पालन जमीनी स्तर पर हो पाएगा? गौरतलब है कि पंद्रह साल बाद भी बहुत सारी महिलाओं को इस कानून के बारे में पता नहीं है, क्योंकि उन्हें बताया ही नहीं जाता।

हमेशा से पुरुष प्रधान समाज वाली सोच ने यह स्वीकार नहीं किया कि पिता और उसकी संपत्ति पर बेटा और बेटी दोनों का बराबर का अधिकार है। बेटियों को संपत्ति के मसले से हमेशा यह कह कर दूर रखा गया है कि उसकी शादी में जो उसे दहेज मिला है या जो मिलने वाला है, असल में वही उसकी संपत्ति है। इसीलिए पिता की संपत्ति को बेटों को दे दी जाए।

अब इस मसले पर सुप्रीम कोर्ट ने स्थिति साफ कर दी, लेकिन क्या यह पुरुष प्रधान समाज इसे स्वीकार करेगा? क्या बेटियां अपने पिता से अपनी संपत्ति मांग पाएंगी और क्या उनके पिता उन्हें अपनी संपत्ति में हिस्सा देंगे? ऐसे कई सवाल हैं जिनके उत्तर मुश्किल हैं। इसलिए इस कानून के बारे में सभी स्कूलों और कॉलेजों में पढ़ाया जाना चाहिए और प्रचार-प्रसार के माध्यम से हर महिला तक इस बात को पहुंचाना चाहिए। बेटियों को उनका हक बिना किसी संकोच मिलना चाहिए, ताकि भविष्य में किसी मुश्किल वक्त पर उन्हें किसी के आगे हाथ न फैलाना पड़े।
’गौरव कुमार, गया, बिहार

कांग्रेस किधर
कांग्रेस पार्टी जहां अपने नए अध्यक्ष की ओर आशा भारी निगाहों से देख रही है, वहीं एक बड़ा सवाल कांग्रेस के सामने चट्टान बनके खड़ा है कि देश का सबसे पुराना राजनीतिक दल क्या अपना अस्तित्व बचाने में कामयाब हो पाएगा? जिस तरह के हालात 2014 और 2019 में कांग्रेस ने देखे, उसमें पार्टी को यह समझना होगा कि अगर जल्दी से जल्दी पारदर्शी राजनीति की नई राह नहीं पकड़ी तो अगले चुनाव के बाद सत्ता तो दूर, वह एक मजबूत विपक्ष भी नहीं बन पाएगी।
’आयुषी दुबे, कानपुर, उप्र

Hindi News के लिए हमारे साथ फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन, टेलीग्राम पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News AppOnline game में रुचि है तो यहां क्‍लिक कर सकते हैं।

Next Stories
1 चौपाल: अधूरा जश्न
2 चौपाल: बचाव के विकल्प
3 चौपालः किसान का हित
ये पढ़ा क्या?
X