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जेल में हिंसा

उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ महीनों में जेलों में हत्या जैसी घटनाएं सामने आई हैं। हाल उन्नाव की जेल में एक कैदी पिस्टल लहराता दिखा। लेकिन इस मामले में योगी सरकार के जेल मंत्री ने सफाई दी कि वीडियो में दिख रही पिस्टल मिट्टी की थी।

Author Published on: July 1, 2019 3:14 AM
उन्नाव जेल में कैदी ने लहराया तमंचा फोटो सोर्स- @adityatiwaree

भारत की जेलों में कैदियों का राज चल रहा है। कैदी बेखौफ होकर जेलों में पार्टियां कर रहे हैं। हैरान करने वाली तो यह है कि जेल के भीतर ही उन्हें नशे का समान, मोबाइल और हथियार आसानी से उपलब्ध हो रहे हैं। जेल के अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से जेलों के भीतर ही अपराधियों का नेटवर्क बड़े आराम से काम कर रहा है। देश की ज्यादातर जेलों की हकीकत यही है। उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ महीनों में जेलों में हत्या जैसी घटनाएं सामने आई हैं।
हाल उन्नाव की जेल में एक कैदी पिस्टल लहराता दिखा। लेकिन इस मामले में योगी सरकार के जेल मंत्री ने सफाई दी कि वीडियो में दिख रही पिस्टल मिट्टी की थी। पर सवाल ये है पिस्टल बनाने के लिए सामान कहां से आया? जिस मोबाइल से ये वीडियो बनाया वह जेल में कैदियों के पास तक कैसे पहुंचा? लुधियाना सेंट्रल जेल में एक कैदी की मौत के बाद वहां भड़के कैदी हिंसा और आगजनी पर उतर आए और पुलिस सुपरिटेंडेंट की गाड़ी फूंक डाली। ये घटनाएं भारत की जेलों की दुर्दशा बयां कर रही है।
’राघव जैन, जलंधर

हत्या और सवाल
हाल में अमेरिकी विदेश विभाग ने भारत में धार्मिक भेदभाव बढ़ने का आरोप लगाया। हमारे विदेश विभाग के प्रवक्ता ने तत्काल प्रभाव से इन आरोपों को खारिज कर दिया। मगर अमेरिकी विदेश मंत्री ने अपनी भारत यात्रा के दौरान हमारे विदेश मंत्री के सामने भारत को धार्मिक अधिकारों का पालन करने की नसीहत दे डाली। लेकिन सवाल है कि क्या अमेरिकी रिपोर्ट को खारिज कर देने भर से ये आरोप गलत साबित हो जाएंगे? भीड़ तंत्र के हाथों मौत की सजा देने की प्रथा भारत में चल पड़ी है। ताजा घटना झारखंड में तबरेज अंसारी की हत्या का है जिसे भीड़ ने पीट-पीट कर मार डाला था। सिर्फ झारखंड में ही पिछले तीन वर्षों में भीड़ ने ग्यारह लोगों को मौत के घाट उतार दिया। अगर सबसे बड़ा लोकतंत्र और कानून एवं संविधान से चलने वाले देश का यह हाल रहेगा तो अमेरिका क्या कोई भी भारत पर अंगुली उठा सकता है। किस-किस के आरोपों को हम खारिज करते रहेंगे?
’जंग बहादुर सिंह, जमशेदपुर

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