ताज़ा खबर
 

चौपाल: बंदी से सबक

नदियों को प्रदूषण से बचाने के लिए सरकारों को उद्योगों से निकलने वाले अवशिष्टों के निस्तारण के विकल्पों पर विचार करना होगा। वरना जो नदियां अभी थोड़ी-बहुत साफ हुई लग रही हैं, वे पहले वाली हालत में आ जाएंगी।

Author Published on: April 8, 2020 3:59 AM
लॉकडाउन की वजह से गंगा के पानी में प्रदूषित पदार्थ नहीं पहुंच रहा है। इससे जल स्वच्छ हुआ है।

देश में इन दिनों बंदी के कारण जहां लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है और अर्थव्यवस्था का पहिया भी लगभग रुक-सा गया है, वहीं दूसरी ओर हमें पर्यावरण के क्षेत्र में इसके सकारात्मक पहलू भी देखने को मिले हैं। जो छोटे-बड़े शहर वायु प्रदूषण से कराह रहे थे, वहां अब हवा काफी हद तक साफ हो चुकी है। जिन बड़े शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक छह-सात सौ तक पहुंच गया था, वहां अह पचास से भी नीचे है। वाहनों के पहिए थम जाने से न सिर्फ धूल मिट्टी के कण, बल्कि जैविक र्इंधन के जलने से उत्सर्जित होने वाली जहरीली गैसों में भी भारी कमी देखने को मिली है। औद्योगिक गतिविधियों के रुकने से ध्वनि, वायु और जल प्रदूषण तीनों ही कम हुए हैं।

अगर हम भविष्य में होने वाले जलवायु परिवर्तन के संकट को भी इसी तरह महसूस कर लें तो ये संपूर्ण मानव जाति के लिए हित कर होगा। इस महामारी से जो सबक अब लिए जा रहे हैं, अच्छा तब होगा जब संपूर्ण वैश्विक जगत इस महामारी से मुक्त होने के उपरांत भी ऐसे प्रयासों को जारी रखे। जैसे हम महीने में एक दिन की बंदी रखें, वाहन चलाने के मामले सम-विषम जैसी व्यवस्था को स्थायी रूप से अपनाने पर विचार करें और लागू हो तो उस पर ईमानदारी से अमल करें।

इसी तरह नदियों को प्रदूषण से बचाने के लिए सरकारों को उद्योगों से निकलने वाले अवशिष्टों के निस्तारण के विकल्पों पर विचार करना होगा। वरना जो नदियां अभी थोड़ी-बहुत साफ हुई लग रही हैं, वे पहले वाली हालत में आ जाएंगी।
’माला मलिक, मेरठ

सहयोग जरूरी
कोरोना महामारी ने मानव सभ्यता को खतरे मे डाल दिया है। कोई भी देश चाहे कितना ही शक्तिशाली क्यों न हो, इससे बच नहीं पाया है। यूरोप के देशों में कोरोना से मरने वालों को दफनाने तक के लिए जगह नसीब नहीं हो पा रही है। हालांकि भारत में इस बीमारी का प्रकोप फिलहाल अभी ज्यादा खतरनाक स्थिति में नहीं पहुंचा है। लेकिन यह भी नहीं कहा जा सकता कि इस बीमारी का फैलाव नहीं होगा। अगर हम अभी भी नहीं संभले तो यह बीमारी अपने तीसरे चरण में पहुंच कर भारी तबाही कर सकती है। अभी भी वक्त है जब हमें इस बीमारी को भगाने के लिए सरकार के दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा।
’अजीत समुंदर, सतना (मप्र)

Hindi News के लिए हमारे साथ फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन, टेलीग्राम पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News AppOnline game में रुचि है तो यहां क्‍लिक कर सकते हैं।

Next Stories
1 चौपाल: असली चेहरा कौन?
2 चौपाल: मुश्किल में दुनिया
3 चौपाल: पैसे का सदुपयोग