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चौपाल: आत्मनिर्भरता की राह

अगर भविष्य में भारत सुरक्षा उपकरणों को अच्छा और सस्ता बनाने में सफल हो जाता है तो निश्चित तौर पर दूसरे देश भारत से अपने देशों के लिए रक्षा उपकरणों को खरीदेंगे, जिससे हमारे देश की अर्थव्यवस्था और मजबूत होगी।

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लेह में शुक्रवार को एक दिवसीय दौरे पर आधुनिक बंदूक उठाकर निशाना लगाते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह। (फोटोः PTI)

‘स्वदेशी हथियार’ (संपादकीय, 11 अगस्त) पढ़ा। भारत सरकार ने जो एक सौ एक सैन्य उपकरणों के आयात पर प्रतिबंध लगाया है, वह निश्चित ही सराहनीय कदम है। भारत दुनिया में सैन्य उपकरणों के आयात के मामले में सऊदी अरब के बाद दूसरे स्थान पर है और निर्यात के मामले में चौबीसवें स्थान पर। लेकिन इस प्रतिबंध के बाद हमारी स्वदेशी कंपनियों को बड़ा फायदा होगा और देश मे रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। अगर रोजगार बढ़ेगा तो देश की अर्थव्यवस्था भी बढ़ेगी और देश की उन्नति भी होगी। विदेशी मुद्रा भंडार का खर्च भी कम होगा और हम उन पैसों को किसी और चीज में लगा पाएंगे।

मसलन, ‘इसरो’ ने पूरी दुनिया मे अपना लोहा मनवाया है। अगर भविष्य में भारत सुरक्षा उपकरणों को अच्छा और सस्ता बनाने में सफल हो जाता है तो निश्चित तौर पर दूसरे देश भारत से अपने देशों के लिए रक्षा उपकरणों को खरीदेंगे, जिससे हमारे देश की अर्थव्यवस्था और मजबूत होगी। उसके बाद दुनिया भारत को आयातक से ज्यादा निर्यातक के तौर पर देखेगी। हाल ही में चीन के साथ चल रहे विवाद के बढ़ने के बाद भारत को रूस के पास एस-400 के लिए जाना पड़ा था, लेकिन रूस ने तय डिलीवरी की सीमा से पहले एस-400 देने से इनकार कर दिया था।

इस लिहाज से देखें तो अगर भारत खुद इसी तरह के उपकरण बना रहा होता तो ऐसी आपातकालीन स्थिति में किसी और देश पर निर्भर नहीं होना पड़ता।
’गौरव कुमार, गया, बिहार</p>

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