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चौपाल: रामराज्य का सपना

राम नाम की माला जपना तो बेहद आसान है, लेकिन राम के द्वारा राम राज्य में किए गए कामों को आज करना बेहद जरूरी है, क्योंकि भगवान राम का काम भी तो मानव मात्र का कल्याण था।

अब लोगों की प्रतीक्षा शुरू हो गई है, जब भव्य राम मंदिर में रामलला विराजमान होंगे।

आखिरकार वर्षों की कानूनी लड़ाई के बाद राम मंदिर निर्माण की आधारशिला पांच अगस्त को रख दी गई। उम्मीद है कि तीन-चार वर्षों में मंदिर भी तैयार हो जाएगा।भगवान राम के साथ रामराज्य की भी बात की जाती है। सब चाहते हैं कि देश में रामराज्य हो। लेकिन आज के हालात देखें तो रामराज्य एक कल्पना ही धूमिल पड़ जाती है। लगता ही नहीं है कि देश में कभी रामराज्य की कल्पना साकार हो भी पाएगी या नहीं।

आज रामराज्य का मतलब ‘कानून व्यवस्था की स्थिति, भेदभाव और भ्रष्ट्राचार रहित प्रशासन, मूल्य वृद्धि पर नियंत्रण, रोजगार के अवसरों का बेहतर सृजन, सबका कल्याण, अर्थव्यवस्था की बेहतर स्थिति, शिक्षा, स्वास्थ्य व अन्य व्यवस्थाओं की बेहतर सुविधाएं, ठगों- जालसाजों और अपराधियों पर सख्ती से नियंत्रण ही है। अगर देश की जनता सुखी होगी तो रामराज्य होगा। इसलिए मंदिर निर्माण के साथ-साथ रामराज्य की कल्पना को भी साक्षात में साकार करना होगा, तभी देश मजबूत होगा।

राम नाम की माला जपना तो बेहद आसान है, लेकिन राम के द्वारा राम राज्य में किए गए कामों को आज करना बेहद जरूरी है, क्योंकि भगवान राम का काम भी तो मानव मात्र का कल्याण था। जबकि वास्तविकता में आज अधिसंख्य मानव तो दुखी, व्यथित और पीड़ित ही हैं।
’हेमा हरि उपाध्याय, खाचरोद (उज्जैन)

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