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चौपाल: चीन के हास्यास्पद दावे

चीन का विस्तारवादी रवैया दुनिया के लिए खतरा बनता जा रहा है। दुनिया भर के देशों में इससे अशांति का माहौल है। चीन का विरोध बढ़ता ही जा रहा है, लेकिन चीन सुधरने को तैयार नहीं है।

China, India, Xi Jinpingचीन का भारत के साथ ही नहीं अन्य 17 देशों से भी विवाद है।

चीन ने रूस के व्लादिवोस्तक पर अपना दावा ठोका है। उसका कहना है कि पहले यह शहर चीन का हिस्सा था, बाद में रूस ने कब्जाया। यदि इतिहास में पीछे जाना शुरू करेंगे तो व्लादिवोस्तक तक पहुंचने में तो एक सौ साठ साल लगेंगे, क्योंकि सन 1860 से पूर्व वह चीन के पास था। किंतु गुलाम कश्मीर, अक्साईचिन और तिब्बत तो केवल सत्तर साल पहले तक भारत के पास थे, या स्वतंत्र थे।

चीन इन्हें छोड़ेगा या पाकिस्तान से खाली करवाएगा? और यदि और तीन वर्ष पीछे चले जाएं तो पता चलेगा कि 1947 तक पाकिस्तान भी भारत का भाग था। यदि तेरहवीं सदी में झांका जाए तो चंगेज खान और कुबलाई खान के समय में खुद चीन मंगोलिया का हिस्सा था और बारहवीं शताब्दी में तो चीन तिब्बत के अधिकार में था और दलाई लामा का शासन बेजिंग व उसके आगे तक चलता था। इसलिए चीन को पुराने दावे छोड़ कर विवादों को शांत करने की दिशा में कदम बढ़ाना चाहिए। ’

अजय मित्तल, मेरठ

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