चौपालः शौर्य का श्रेय

भाजपा सरकार की चौतरफा नाकामियों के बीच मर्यादा को ताक पर रख कर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ को जिस तरह भुनाने की कोशिश चल रही है, वह हैरान करने वाली है।

भाजपा सरकार की चौतरफा नाकामियों के बीच मर्यादा को ताक पर रख कर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ को जिस तरह भुनाने की कोशिश चल रही है, वह हैरान करने वाली है। इसी क्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने भोपाल में शौर्य-स्मारक का शिलान्यास करते हुए कहा कि सेना बोलती नहीं, पराक्रम करती है। यह कोई नई बात नहीं है। सेना क्या पहले पराक्रम नहीं कर रही थी? लेकिन उनके कहने का आशय यही निकलना है कि सेना जो कुछ कर रही है, उनके काल में कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि हमारे रक्षामंत्री भी नहीं बोलते हैं। लेकिन हम निरंतर देख रहे है कि रक्षा मंत्री खूब बोल रहे हैं। बल्कि वे तो बोलते हैं कि सेना हनुमान है, उसे अपनी शक्ति याद दिलानी पड़ती है और जामवंत की भूमिका में रह कर वे उसे याद दिला रहे हैं। अब जनता रक्षामंत्री की माने या प्रधानमंत्री की कि जो भी हो रहा है, वह सेना नहीं मोदी कर रहे हैं। गौर करने वाली बात यह है कि जब बहुप्रचारित सर्जिकल स्ट्राइक का श्रेय मोदी को दिया जा रहा है तो देश यह भी पूछ सकता है कि जिस लक्षित हमले से पाकिस्तान को सबक सिखाया गया और आंतकियों के पाक-अधिकृत क्षेत्र के अड्डे नेस्तनाबूद कर दिए गए तो अब भी कश्मीर में बार-बार आतंकी हमले क्यों हो रहे हैं? ये आंतकी आ कहां से रहे हैं। जब मोदी भोपाल में शौर्य-स्मारक का शिलान्यास करते हुए अपना भाषण दे रहे थे, उसी समय श्रीनगर से लगे जकूरा में हुए आंतकी हमले में दो सैनिक शहीद हो गए थे और कई घायल। इससे कुछ पहले श्रीनगर के पंपोर क्षेत्र में एक सरकारी भवन में दो आंतकी घुस गए थे, जिनसे निपटने में तीन दिन लगे और आठ सैनिक और नागरिक मारे गए।
खैर, लोकतंत्र में कोई सवाल न उठाए, इसलिए शौर्य-स्मारक से सैनिकों के सम्मान की शिक्षा भी उन्होंने दे डाली कि सैनिक अगर हमारे सामने से गुजरे तो उनके सम्मान में खड़े हो जाएं और उनके आगे हाथ जोड़ लें।
दरअसल, सेना के मौजूदा गुणगान के जरिए अपनी नाकामियों को ढकने का प्रयास किया जा रहा है। हथियारों के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का दावा करते हुए यह कैसे संभव है, जब रक्षा क्षेत्र में शत-प्रतिशत विदेशी निवेश की ओर कदम बढ़ाए जा रहे हैं। हमारे सैन्य अड्डों को भी अमेरिकी रणनीति समझौते के तहत उनके उपयोग के लिए भेंट किया जा रहा है। जो पाकिस्तान करता रहा है, अब हम कर रहे हैं। एक झटके में राफेल हेलिकॉफ्टर खरीद कर सौदे कर लिए गए। वहीं पाकिस्तान के साथ रूस के सैन्य अभ्यास की खबर के बाद रूस से 33,500 करोड़ रुपए के शस्त्र खरीद की बात सामने आई है। पल-पल बदलते रिश्तों की पेशकश किसे कब तक बांध पाएगी, यह तो समय बताएगा, लेकिन यह सच है कि स्वार्थ के रिश्ते कभी स्थायी नहीं होते। भारत की अपनी स्वतंत्र विदेश नीति थी और यह गुटनिरपेक्ष आंदोलन का नेता था। लेकिन आज यह कभी इधर, कभी उधर झांक रहा है।
’रामचंद्र शर्मा, तरूछाया

Next Stories
1 चौपालः बदलाव का दौर?
2 चौपालः सवाल और भी हैं
3 चौपाल: क्या औचित्य
ये पढ़ा क्या?
X