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चौपाल: परीक्षा बनाम रोजगार

चाहे हम आशा कार्यकतार्ओं की बात करें, विवाह से जुड़े लोग (जैसे आर्केस्ट्रा, बैंड कार्यकर्ता, सेट डिजाइनर आदि), तमाम निजी व्यवसाय से जुड़े रोजगार, निजी और सरकारी स्कूल। कॉलेज के शिक्षक, किसान और सहस्राब्दी उनके जीवन यापन के लिए बड़ी मुसीबत हैं।

unemployment allowanceबेरोजगारी भत्ते में बड़ी राहत दे सकता है ESIC

सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि जुलाई के महीने में पचास लाख वेतनभोगी वर्ग के लोगों ने अपनी नौकरी खो दी और अप्रैल से अब तक लगभग दो करोड़ नौकरियां गई हैं। यह आंकड़ा वास्तव में डरावना है और इस समस्या का सरकार को समाधान करने की आवश्यकता है, क्योंकि प्रत्येक वेतनभोगी वर्ग के व्यक्ति में कम से कम तीन सदस्य जुड़े होते हैं, जो सीधे-सीधे प्रभावित हुए हैं। साथ ही चार करोड़ लोग जो पर्यटन क्षेत्र से संबंधित हैं, बुरी तरह प्रभावित है और अपने जीवनयापन के लिए संघर्ष कर रहे थे। सरकार ने अभी तक कुछ भी नहीं किया है जो चिंता का विषय है।

चाहे हम आशा कार्यकतार्ओं की बात करें, विवाह से जुड़े लोग (जैसे आर्केस्ट्रा, बैंड कार्यकर्ता, सेट डिजाइनर आदि), तमाम निजी व्यवसाय से जुड़े रोजगार, निजी और सरकारी स्कूल। कॉलेज के शिक्षक, किसान और सहस्राब्दी उनके जीवन यापन के लिए बड़ी मुसीबत हैं।

एनआरए तभी कारगर है, जब नौकरियां होंगी। जिस गति से नौकरियां जा रही हैं और खत्म की जा रही हैं, उसमें इस परीक्षा की क्या उपयोगिता रहेगी। तो क्या यह घोषणा एक मृग-मरीचिका की तरह नहीं है? राष्ट्रीय भर्ती एजेंसी (एनआरए) पर ध्यान केंद्रित करने के बजायर सरकार को रोजगार के मुद्दे को जल्द से जल्द हल करना चाहिए क्योंकि यह उनके जीवन और कल्याण से संबंधित है।
’गौरव कुमार, गया, बिहार

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