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चौपाल : दर्द की गवाही, मुक्ति का मार्ग

यह तीन तलाक की त्रासदी का सिर्फ एक उदाहरण है, जिससे मुसलिम महिलाओं का दर्द समझा जा सकता है।

Author April 6, 2017 06:07 am
प्रतीकात्मक चित्र

दर्द की गवाही
मुसलिम महिलाओं के लिए तीन तलाक हमेशा ही दर्द का सबब रहा है। किसी छोटी बात पर भी अगर शौहर नाराज हो जाए तो वह तीन बार तलाक बोल कर बीवी की जिंदगी तबाह कर सकता है। हाल ही में उत्तर प्रदेश के महेबागंज की सबरीन को उसके शौहर तूफैल ने फोन पर ही तलाक दे दिया। सबरीन का कसूर सिर्फ इतना था कि वह शौहर के कहने पर अपने मायके से बाईस लाख रुपए नहीं ला सकी थी। इससे तूफैल इतना नाराज हुआ कि उसने फोन पर ही तलाक दे दिया। अब अपनी ग्यारह माह की बेटी के साथ सबरीन मायके में रह रही है।
यह तीन तलाक की त्रासदी का सिर्फ एक उदाहरण है, जिससे मुसलिम महिलाओं का दर्द समझा जा सकता है। लंबे समय से मुसलिम महिलाओं पर हो रहा यह अत्याचार अब बंद होना चाहिए।
नीता सिंह परिहार, गाजियाबाद
मुक्ति का मार्ग

जो लोग यह समझते हैं कि कर्ज माफी से समस्या से मुक्ति मिल जाएगी वे भ्रम में पड़े हैं। ‘अम्मी’ और ‘मम्मी’ की तरह दोनों एक नहीं हैं। ‘माफी’ और ‘मुक्ति’ में खासा अंतर होता है।
‘मुक्ति’ का हमारे संस्कारों में बड़ा आध्यात्मिक महत्त्व रहा है। इस शब्द से पवित्रता की सुगंध बिखरती है। संसार से मुक्ति के बाद आदमी इस दुनिया की गंदगी को छोड़ कर ईश्वर में विलीन हो जाता है। बुरा से बुरा व्यक्ति देह मुक्ति के बाद आदरणीय और पूजनीय होने की अभिलाषा में तड़पता रहता है। कुछ अच्छे और भले बुजुर्ग जिन्हें होनहार संतानें वृद्धाश्रमों में भर्ती करा कर अपना वर्तमान सुखद बनाने का प्रयास करती हैं, वे भी देह मुक्ति के बाद मोतियों की माला पहन कर अपनी संतति को दुआओं से नवाजते हैं।
यही कारण है कि इसी आध्यात्मिकता और पवित्रता को ध्यान में रख कर हमारे यहां मुक्ति शब्द का अधिकाधिक प्रयोग करने की कोशिश रहती आई है। स्वतंत्रता संग्राम के व्यापक फिरंगी मुक्ति आंदोलन के बाद गरीबी मुक्ति पर हमारा जोर रहा। इसी बड़े उद्देश्य को लेकर कई मुक्ति अभियान चलते रहे हैं।
मलेरिया, चेचक, पोलियो मुक्ति के अलावा और भी प्रयास हुए हैं। हम एक बुराई से देश को मुक्त करते हैं कि रावण के सर की तरह फिर नया अभिलाषी मुक्ति की कामना लिए सामने आ खड़ा होता है- ये लो, मैं आ गया! फिर उससे मुक्ति के उपायों में जुट जाते हैं। यह एक निरंतर प्रक्रिया है।
आप खुद समझदार हैं लिहाजा, सो थोड़े कहे को ज्यादा समझने की काबिलियत आप में है। माफी से किसानों और कर्जदारों के दुख दूर होते हैं। मुक्ति अभियानों में प्रायोजकों, अभिनेताओं, बिचौलियों और अधिकारियों की भी चांदी होती है। काम ऐसा हो जिसमें सबका भला हो।
कर्ज लेना किसानों की विवशता है। इस विवशता से मुक्ति मिलनी चाहिए। बाबा कबीर कह गए हैं ‘ढाई आखर प्रेम का पढ़े सो पंडित होय।’ मुक्ति में भी ढाई अक्षर हैं और प्रेम में भी। देश को विश्व का पंडित (गुरु) बनाने के लिए बहुत आवश्यक है कि हम मुक्ति को प्रेम पूर्वक आत्मसात करें। मुक्ति मार्ग सबके कल्याण का पथ होता है!
ब्रजेश कानूनगो, कनाड़िया रोड, इंदौर

“मुस्लिम संगठन भी कर रहे हैं वर्तमान तीन तलाक प्रक्रिया का विरोध”: कानून आयोग

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