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चौपालः शराब का मार्ग

सर्वोच्च न्यायालय के 1 अप्रैल 2017 से हाईवे से 500 मीटर के भीतर खुली शराब की सभी दुकानें बंद क रने के फै सले पर अमल की जिम्मेदारी सभी राज्य सरकारों की है।

Author April 8, 2017 5:26 AM
चित्र का इस्तेमाल प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है।

सर्वोच्च न्यायालय के 1 अप्रैल 2017 से हाईवे से 500 मीटर के भीतर खुली शराब की सभी दुकानें बंद करने के फै सले पर अमल की जिम्मेदारी सभी राज्य सरकारों की है। राजस्थान में हाईवे से 500 मीटर के भीतर खुली शराब की दुकानों की संख्या 2800 के क रीब है और यहां की वसुंधरा सरकार को लोगों की जान से ज्यादा राजस्व की चिंता है। राजस्व की हानि से बचने के लिए वह पतली गली से शराब की बिक्री जारी रखने की जुगत में लग गई है। वह शहरों के बीच से निक लने वाले हाईवे को डि-नोटिफाई (गैर अधिसूचित) क रके शहरी सड़कों में बदल रही है। सालभर पहले अपनी ही रोडवेज बसों के समांतर निजी बसों का संचालन सुनिश्चित क रने के लिए भी उसने ऐसी ही पतली गली निकाल कर राजमार्गों को डि-नोटिफाई क र दिया था। सर्वोच्च न्यायालय ने जनहित याचिका की सुनवाई क रते हुए इस तथ्य को सही माना है कि शराब पीकर गाड़ी चलाने से देश भर में तक रीबन डेढ़ लाख मौतें हर साल हो रही हैं। इसका दंश गाड़ी में सवार और उससे दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति ही नहीं बल्कि उनका परिवार भी सहता है। लिहाजा, न्यायालय ने सरकार को आदेश दिया कि इन हादसों को रोक ने के लिए वह हाईवे से क म से क म 500 मीटर के भीतर की शराब दुकानें बंद क रने के साथ-साथ वहां लगे शराब की दुकानों की ओर इशारा क रने वाले साइन बोर्ड भी हटवाने का काम क रे। लेकि न राजस्थान की भाजपा सरकार इन दुकानों येनके न प्रकारेण चालू रखने के रास्ते ढ़ूंढ़ रही है।

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गौरतलब है कि राजस्थान में ‘नशामुक्त भारत अभियान’ सहित कु छ जागरू क सामाजिक संगठन जोरशोर से शराबबंदी का आंदोलन चलाए हुए हैं। इसका असर भी देखने को मिला है और लोग आगे बढ़ क र शराब की दुकानें बंद क राने के आंदोलन से जुड़ रहे हैं। पिछले महीने जयपुर की आमेर तहसील की रोजदा पंचायत में शराबबंदी के पक्ष में 88 प्रतिशत मतदान के जरिए शराब की दुकान हटानी पड़ी थी। मतदान के जरिये शराबबंदी का राजस्थान में यह दूसरा मामला है। इससे पूर्व राजसमंद में भी ऐसा ही हो चुक ा है। रोजदा पंचायत में शराबबंदी के पक्ष में हुए मतदान की खबर पूरे प्रदेश में एक नई प्रेरणा बनक र आई और 35 पंचायतों ने सरकार के समक्ष मतदान का आवेदन भेजा है। शराब के खिलाफ बढ़ी जनजागृति क ा ही परिणाम है कि राज्य में उसकी बिक्री भी क म हुई है।

बाडमेर क्षेत्र के लोगों ने शराब के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। अलवर, जयपुर सहित क ई इलाकों में महिलाएं शराब की दुकानें बंद क राने में आगे बढ़ क र मोर्चा ले रही हैं क्योंकि वे ही इसके दुष्प्रभावों से सबसे अधिक उत्पीड़ित हो रही हैं। कुछ दिन पहले जारी हुई आबकारी राजस्व रिपोर्ट में प्रदेश के 36 ब्लाकों में शराब क म बिक ने से 2200 क रोड़ रु पए के राजस्व की हानि की बात सामने आई है। राजस्थान सरक ार तो इस पर भी बड़ी कु पित हुई और संबधित ब्लाक अधिकारियों को पत्र लिख क र इस हानि के प्रति नाराजगी खाते हुए डांट पिलाई। जब सरकार को जन स्वास्थ्य से ज्यादा राजस्व प्यारा लगने लगे तो समझना क ठिन नहीं रह जाता कि सरकार जनता के हितों से खिलवाड़ क र प्रभावी शराब लाबी के हितों के लिए काम क र रही है।

रामचंद्र शर्मा, तरुछाया नगर, जयपुर

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