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चौपालः ऊहापोह के बीच

लाखों रुपए खर्च करके परीक्षाओं की तैयारी में जुटे विद्यार्थी अपने भविष्य को लेकर विगत छह माह से चिंतित रहे हैं।

लाखों रुपए खर्च करके परीक्षाओं की तैयारी में जुटे विद्यार्थी अपने भविष्य को लेकर विगत छह माह से चिंतित रहे हैं।

कोरोना के कारण बदहाल हो रही शिक्षा व्यवस्था के बीच मेडिकल पाठ्यक्रम के लिए आयोजित होने वाली महत्त्वपूर्ण परीक्षाओं को टालने की अर्जी सुप्रीम कोर्ट ने ठुकरा दी है और इनके लिए परीक्षाओं की तिथि की घोषणा भी कर दी है। सही है कि सरकार संक्रमण के मद्देनजर स्कूल खोलने की हिम्मत नहीं कर पा रही है तो नए सत्र के तीन माह बीत जाने के बाद भी अब चिंताएं बढ़ती ही जा रही है। विद्यार्थियों को ऑनलाइन के जरिए शिक्षण से जोड़ा अवश्य गया है, मगर इसकी वास्तविकता और उसके फायदे से खुद सरकार अच्छी तरह परिचित है। ऐसे में सरकार अधर में है कि क्या करें, क्या न करें! निश्चय ही यह निर्णय चिंता, भय और दुविधा में पड़े विद्यार्थियों के लिए संजीवनी का काम करेगा। लाखों रुपए खर्च करके परीक्षाओं की तैयारी में जुटे विद्यार्थी अपने भविष्य को लेकर विगत छह माह से चिंतित रहे हैं।
’अमृतलाल मारू ‘रवि’, धार, मप्र

दुरुपयोग के मंच
सोशल मीडिया के मंच सूचना क्रांति की महत्त्वपूर्ण उपलब्धियों में एक है। वर्तमान में जब समाचार चैनलों की निष्पक्षता संदेह के दायरे में है, तब सोशल मीडिया टीवी चैनलों के समांतर सूचना के स्रोत में स्थापित हुआ है। लेकिन अमरीकी जर्नल वालस्ट्रीट दावे के अनुसार सत्ताधारी पार्टी के द्वारा इसका प्रयोग समाज मे वैमनस्यता फैलाने के लिए किया गया। इसने भारत में फिलहाल एक तीखी बहस छेड़ दी है। यह भारत जैसे बहुसांस्कृतिक और लोकतांत्रिक देश के एकता के लिए गंभीर खतरे का विषय है। राजनीतिक पार्टियां चुनावों में लाभ के लिए जिस तरह सोशल मीडिया का दुरुपयोग करती रही हैं, इससे लगता है कि अब स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव बीते दिनों की बात हो जाएगी।
’सूर्यदेव प्रजापति, आंबेडकर नगर, दिल्ली

शादी की उम्र
एक महिला को अपने जीवन काल में अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इनमें से ही एक चुनौती है उसका कम आयु में ही विवाह कर देना। लेकिन हाल ही में केंद्र सरकार ने जो संकेत दिया है, उसके मुताबिक लड़कियों की शादी में बदलाव हो सकता है। इसके मद्देनजर केंद्र सरकार ने एक कमिटी गठित की है जो लड़की की विवाह की आयु को 18 वर्ष से बढ़ाकर 21 वर्ष करने पर अपनी रिपोर्ट पेश करेगी, क्योंकि यह हो सकता है कि 18 वर्ष की उम्र में महिला प्राकृतिक यानी शारीरिक रूप से मां बनने की स्थिति में हो, लेकिन यह जरूरी नहीं कि वह इस समय मानसिक और आर्थिक स्थिति के स्तर पर मजबूत हो। केंद्र सरकार के इस निर्णय से कई लाभ हो सकते हैं, जैसे मातृत्व मृत्यु दर के साथ-साथ वैवाहिक बलात्कार के मामलों को कम किया जा सकेगा। वहीं कुपोषण का स्तर भी कम होगा। सबसे अहम लाभ यह होगा कि इससे लड़कियां अपनी शिक्षा को विस्तार दे पाएंगी। कुछ चुनौतियां भी हैं कि इसे व्यावहारिक रूप में कितना अपनाया जा सकता है। दूसरे, यह फैसला विवाह तक संबंधित ही हो तब ठीक है, क्योंकि अठारह वर्ष की आयु में सरकार चुनने और ड्राइविंग लाइसेंस आदि कल्याणकारी योजनाओं में उम्मीदवार को पात्रता का अधिकार प्राप्त हो जाता है।
’सौरव बुंदेला, भोपाल., मप्र

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