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चौपालः बीमारी के बीच

शिक्षा संस्थानों को खोलने के लिए भी हरी झंडी सरकारों और प्रशासन ने दे दी है, हालांकि प्राथमिक कक्षाओं को खोलने की इजाजत नहीं है।

coronavirus, coronavirus latest news, lockdown, lockdown 5.0 guidelines शिक्षा संस्थानों को खोलने के लिए भी हरी झंडी सरकारों और प्रशासन ने दे दी है।

वैश्विक महामारी कारण देश के सभी शिक्षा संस्थान लगभग सात महीनों से बंद हैं। हालांकि लगभग स्कूलों ने विद्यार्थियों की पढ़ाई को प्रभावित होने से बचाने के लिए ऑनलाइन पढ़ाई का इंतजाम किया है, लेकिन हमारे देश में सभी विद्यार्थी इस व्यवस्था का उचित लाभ ले रहें होंगे, यह मुमकिन नहीं है। गरीबी, मोबाइल नेटवर्क और अन्य कुछ समस्याएं इस व्यवस्था के लिए बाधा हैं। अब देश धीरे-धीरे पूर्णबंदी से राहत की ओर बढ़ रहा है। शिक्षा संस्थानों को खोलने के लिए भी हरी झंडी सरकारों और प्रशासन ने दे दी है, हालांकि प्राथमिक कक्षाओं को खोलने की इजाजत नहीं है। नौंवीं से बारहवीं कक्षाओं के लिए भी यह जरूरी नहीं किया गया है कि विद्यार्थियों को स्कूल आना ही पड़ेगा। इसके साथ ऑनलाइन पढ़ाई भी जारी रखने के आदेश सरकारों ने दिए हैं।

इस फैसले से लगभग सभी शिक्षकों को यह दिक्कत आएगी की वे स्कूल आने वाले विद्यार्थियों को पढ़ाएंगे या फिर ऑनलाइन पढ़ने वालों को। ऐसे तो विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है। इसका कुछ समाधान सरकार, प्रशासन और स्कूलों के प्रशासन को करना होगा।

स्कूल आने वाले विद्यार्थियों को कोरोना के प्रति बेहद सावधानी बरतनी होगी। इसके लिए इनके माता-पिता और शिक्षकों को गंभीरता दिखानी होगी। अगर बोर्ड की परीक्षाओं को मार्च-2021 में करवाने का प्रावधान किया जाता है तो इसे ध्यान में रखते हुए उन कक्षाओं के विद्यार्थियों को अभी से पढ़ाई के प्रति गंभीर हो जाना चाहिए, जिनकी खासतौर पर बोर्ड की परीक्षाएं हैं। बीता समय वापस नहीं आता है।
’राजेश कुमार चौहान, जालंधर, पंजाब

खरीदारी की मुश्किल
महामारी के कारण हुई पूर्णबंदी के चलते अर्थव्यवस्था सुस्त हुई और निजी और असंगठित क्षेत्र के लगभग दो करोड़ लोगों की नौकरियां चली गईं। अर्थव्यवस्था में जान फूंकने और बाजार में मांग पैदा करने के लिए सरकार ने जो पैकेज घोषित किया, उसका मुख्य केंद्र सरकारी कर्मचारी हैं। यहां सरकार ने एक सुरक्षित दांव खेला है और मांग बढ़ाने के लिए उस वर्ग पर भरोसा किया, जिसकी नौकरी, आय और बचत इस दौर में भी महफूज रही। अब सरकार को थोड़ी और दरियादिली दिखानी चाहिए और अब तक हर राहत पैकेज और छूट से महरूम रहे आम आय करदाताओं के लिए भी ऐसी ही कोई योजना लानी चाहिए। जब तक आम लोगों की क्रयशक्ति नहीं बढ़ेगी, तब तक बाजार सामान्य नहीं हो सकेगा और अर्थव्यवस्था में सुधार की गुंजाइश नहीं बनेगी।
’बृजेश माथुर, गाजियाबाद, उप्र

महंगाई की मार
इन दिनों दैनिक जीवन की जरूरतों से लेकर फल और सब्जी, सभी के भाव आसमान छू रहें हैं। एक तरफ लंबे समय तक देश में पूर्णबंदी होना, आर्थिक गतिविधियों का रुकना सभी के लिए समस्या बना हुआ था, अब इस महंगाई की आग से स्थिति और ज्यादा भयावह हो गई है। अभी सब अपने अपने दैनिक कारोबार को नियमित नहीं कर पाए हैं कि थाली के सामने मुश्किल आ गई है। ऐसा लगता है कि सरकार ने भी इस मुद्दे से रुख मोड़ लिया है। चुनावी वादे के दौरान सभी की जुबान पर सबसे पहला शब्द महंगाई कम करने का ही होता है, लेकिन अब सभी ने मौन साध रखा है। एक राज्य में चुनाव है, फिर भी उस जगह से महंगाई का मुद्दा गायब है। यह दुखद है।
’अभिनव त्रिपाठी, बलिया, उप्र

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