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चौपालः नकल पर नकेल

नकल की विसंगति का परिणाम यह होता है कई बार जी-तोड़ मेहनत करने वाले पीछे रह जाते हैं और जुगाड़ तंत्र का प्रयोग करने वाले आगे। ऐसे भ्रष्ट तरीके अपना कर सरकारी पद वाले युवा समाज, देश और परिवेश का कितना भला कर पाएंगे, यह गंभीरतापूर्वक सोचने वाली बात है।

Author April 9, 2018 6:29 AM
देश में एक के बाद एक प्रतिष्ठित परीक्षाओं के पेपर लीक होने की घटनाएं बेहद चिंताजनक हैं।

देश में एक के बाद एक प्रतिष्ठित परीक्षाओं के पेपर लीक होने की घटनाएं बेहद चिंताजनक हैं। पहले एसएससी और अब सीबीएसई पेपर लीक ने परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता को सवालों के घेरे में ला दिया है। इन घटनाओं से स्पष्ट है कि हमारे शैक्षणिक तंत्र में संगठित भ्रष्टाचार और कदाचार का किस कदर माहौल बन गया है।

अफसोस की बात है कि बोर्ड और प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक करना या गैर-कानूनी तरीकों से परीक्षा पास कराना अब संगठित अपराध का स्वरूप धारण कर चुका है, जहां गिरोह कई परीक्षाओं में अपना जाल फैलाते हैं। वास्तव में राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और बिहार में प्रश्नपत्र लीक कराने वाले ऐसे विशेषज्ञों की फौज खड़ी हो चुकी है, जो छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ ही नहीं करते, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था को खुली चुनौती दे रहे हैं। नकल माफिया का बड़ा गिरोह टेक्नोलॉजी के बल पर परीक्षा प्रश्नपत्रों की सुरक्षा में सेंध लगा रहा है। गिरफ्तार जालसाजों के पास जो उपकरण व यंत्र जब्त किए जा रहे हैं, उनसे भी स्पष्ट होता है कि गिरोह पेशेवर तरीके से काम करता है। हैरान करने की बात है कि शासन-प्रशासन द्वारा परीक्षा की संवेदनशीलता और गोपनीयता के लंबे-चौड़े दावे तो किए जाते हैं, लेकिन शिक्षा माफियाओं के आगे सब सिफर नजर आते हैं। कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) और सीबीएसई के प्रश्नपत्र लीक होने के मामलों ने एक बार फिर साबित किया है कि तमाम दावों के बावजूद परीक्षा तंत्र नकल माफिया की घुसपैठ रोकने में नाकाम रहा है।

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नकल की विसंगति का परिणाम यह होता है कई बार जी-तोड़ मेहनत करने वाले पीछे रह जाते हैं और जुगाड़ तंत्र का प्रयोग करने वाले आगे। ऐसे भ्रष्ट तरीके अपना कर सरकारी पद वाले युवा समाज, देश और परिवेश का कितना भला कर पाएंगे, यह गंभीरतापूर्वक सोचने वाली बात है। सवाल है कि क्या हमारे देश की बोर्ड और प्रतियोगी परीक्षाएं शिक्षा माफिया के रहमोकरम पर निर्भर रहेंगी? प्रश्न यह भी है कि बेहद चौकसी और गोपनीयता के बावजूद प्रश्नपत्र लीक होने की घटना अनवरत जारी कैसे है? क्या दिल्ली विश्वविद्यालय और संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं की तरह शिक्षा बोर्डों और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं को बेहतर, प्रभावी, कुशल व फूलप्रूफ नहीं बनाया जा सकता? इसके लिए दृढ़ राजनीतिक इच्छा शक्ति का परिचय देना होगा।

अब समय आ गया है नकल रोकने के लिए देश भर में कठोर कानून बनाया जाए ताकि नकल माफिया के दिल में कानून का खौफ पैदा हो सके। यहां यह भी ध्यान देना नितांत आवश्यक है कि स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता सुधारे बगैर नकल पर नकेल का प्रयास ज्यादा कारगर साबित नहीं होने वाला है, इसका हालिया उदाहरण उत्तर प्रदेश में बोर्ड परीक्षाओं में नकल पर सख्ती की वजह से दस लाख छात्रों का बोर्ड परीक्षाएं छोड़ देने का है।

कैलाश मांजू बिश्नोई, जोधपुर

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