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चौपाल: अफवाहों के बीच

किसी के द्वारा डाली गई भ्रामक सामग्री कुछ समय में हजारों लोगों तक पहुंच जाती है। सोशल मीडिया का दौर कहे जा रहे इस युग में फेक न्यूज के बढ़ते मामलों ने उसकी विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े किए हैं। सोशल मीडिया एक अभिव्यक्ति का स्वतंत्र माध्यम है। परंतु इसका मतलब यह नहीं कि इस माध्यम के जरिए लोग गलत चीजें फैलाएं।

लॉकडाउन के दौरान सोशल मीडिया पर उठाई जा रहीं विरोध की आवाजें।

पूर्ण बंदी के दौरान सोशल मीडिया के जरिए कोरोना से संबंधित खबरों को लेकर जिस तरह से अफवाहें फैलाने की घटनाएं सामने आई हैं, वह गंभीर चिंता पैदा करने वाली बात है। ये अफवाहें महामारी से कहीं ज्यादा घातक साबित हो रही हैं। लोग घरों में बंद हैं। ऐसे में सोशल मीडिया इस्तेमाल करने वाले लोगों की संख्या और उस पर बिताने वाले समय में भी बढ़ोतरी हुई है। सोशल मीडिया पर रोजाना गलत संदेश, वीडियो आदि की भरमार देखने को मिल रही है। ऐसी गलत सूचनाओं, अफवाहों या फेक न्यूज के चलते सबसे बड़ा नुकसान यह हो रहै है कि इससे समाज में अलगाव और अंधविश्वास फैलने का खतरा बढ़ रहा है। इन अफवाहों का प्रभाव भी बहुत व्यापक होता है।

किसी के द्वारा डाली गई भ्रामक सामग्री कुछ समय में हजारों लोगों तक पहुंच जाती है। सोशल मीडिया का दौर कहे जा रहे इस युग में फेक न्यूज के बढ़ते मामलों ने उसकी विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े किए हैं। सोशल मीडिया एक अभिव्यक्ति का स्वतंत्र माध्यम है। परंतु इसका मतलब यह नहीं कि इस माध्यम के जरिए लोग गलत चीजें फैलाएं। इस माध्यम में कोई रोक-टोक न होने से इसके दुरुपयोग का खतरा ज्यादा बढ़ गया है।

हालांकि दिल्ली दंगों के बाद से सरकार की तरफ से वाट्सऐप पर झूठी खबरें फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कही गई थी। लेकिन सच्चाई तो यह है कि अफवाह फैलाने वालों की कुल संख्या का दस फीसद भी पकड़ में नहीं आ पाता। हमारे समाज में लोग अफवाहों को तेजी से आगे बढ़ा तो देते हैं, लेकिन उसकी सच्चाई पता चलने पर अफवाह फैलाने वाले व्यक्ति की शिकायत तक करने का साहस नहीं दिखाते। लोगों को इस तरह की भ्रामक खबरों के प्रति जागरूक होना होगा।

सरकार को जनता को भ्रामक खबरों के प्रति जागरूक करने और इस तरह की खबरों का पता लगाने के प्रयास लगाने पर ओर अधिक बल देना होगा। विश्व स्वास्थ्य संगठन, पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट, तथ्यों की जांच से संबंधित वेबसाइटों पर जाकर और स्वयं पुन: जांचे बिना किसी भी खबर को डालने या फैलाने से बचना चाहिए। इस समय पूरी दुनिया कोरोना जैसी महामारी से जूझ रही है। ऐसे में सरकार जनता की भलाई के दिन रात कार्य कर रही है। इस स्थिति में हम नागरिकों का भी यह फर्ज बनता है कि संकट की इस घड़ी में देश का प्रत्येक नागरिक समाज के लिए सकारात्मक स्थिति को बनाए रखने में सहयोग करे।
’अखिल सिंघल, दिल्ली विवि, दिल्ली

दोहरा संकट
निसंदेह समूचा विश्व इस समय दोहरी मार झेल रहा है। एक तरफ तो कोरोना महामारी ने बड़े से बड़े देशों को झकझोर कर रख दिया है और दूसरी तरफ अर्थव्यवस्था की मंदी और गहरा गई है। भारत भी इससे अछूता नही है। भारत में तो आर्थिक सुस्ती कादौर पिछले दो-ढाई साल चल रहा है। निसंदेह महामारी से निपटना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए, लेकिन यह वक्त अर्थव्यवस्था में बुनियादी सुधारों पर काम करने का भी है, ताकि जैसे ही धीरे-धीरे हालात सुधारने लगें और जिंदगी वापस पटरी पर आने लगे, तो सरकार इन सुधारों को लागू करे और अगले वित्तीय वर्ष मे हमारी अर्थव्यस्था वापस सही दिशा पकड़ ले। एशियाई विकास बैंक का कथन सच हो जाए, इसके लिए जमीनी स्तर पर बहुत से कार्य हमारी सरकार और वित्तमंत्री को करने हैं।
’बाल गोविंद, नोएडा

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