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संकट का पाठ

महामारी की दूसरी लहर ने देश में फिर से पूर्णबंदी की स्थिति ला दी है, जिससे विद्यालयों के बंद होने से समूची शिक्षा व्यवस्था पर इसका बेहद गंभीर असर पड़ा है।

Coronavirus, COVID-19, National Newsभारत में गहरा चुके संकट पर विश्वविख्यात कोविड विशेषज्ञ डॉ एंटनी फॉची ने ‘दि इंडियन एक्सप्रेस’ को दिए इंटरव्यू में सुझाव दिए हैं। इसी बीच, AIIMS के रणदीप गुलेरिया ने भी बताया है कि आखिर देश में कोरोना से होने वाली मौतों के पीछे क्या प्रमुख कारण हो सकते हैं। (फोटोः एजेंसियां)

महामारी की दूसरी लहर ने देश में फिर से पूर्णबंदी की स्थिति ला दी है, जिससे विद्यालयों के बंद होने से समूची शिक्षा व्यवस्था पर इसका बेहद गंभीर असर पड़ा है। आॅनलाइन माध्यमों से कुछ प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन इसकी गुणवत्ता और पहुंच प्रारंभिक शिक्षा हासिल करने वाले बच्चों के लिए न के बराबर है।

ऐसे में अभिभावकों का चिंतित होना लाजिमी है, जिन्हें अपने बच्चे के भविष्य की नींव खोखली नजर आ रही। आवश्यकता है दूरदर्शन, आॅल इंडिया रेडियो आदि माध्यमों से विशेष कार्यक्रमों के जरिए बच्चों में सीखने-समझने का स्तर तैयार करने की। इसके साथ ही शिक्षकों के द्वारा सामुदायिक स्तर पर भी कुछ पहलकदमी की जा सकती हैं, ताकि शिक्षा के बुनियादी आधार की मजबूती कायम रखी जा सके।
’दिनेश शाह, सिंगरौली, मप्र

खाली हाथ

पांच राज्यों के चुनाव परिणामों से यही जाहिर हुआ है कि कांग्रेस का जनाधार दिन-प्रतिदिन घटता जा रहा है। कांग्रेस के हाथ से एक-एक कर सभी राज्य निकलते जा रहे हैं। पश्चिम बंगाल में कांग्रेस का सफाया हो चुका है, असम, केरल और पुडुचेरी में कांग्रेस पार्टी उम्मीद लगाए हुए थी, लेकिन जनता ने उसे नकार दिया। आज कांग्रेस के पास कार्यकतार्ओं और नेताओं की घोर कमी हो चुकी है। राहुल गांधी कांग्रेस पार्टी को सफल नेतृत्व प्रदान करने में नाकाम साबित हो रहे है। जरूरत इस बात की है कि किसी योग्य नेता के हाथों में पार्टी की कमान सौंपी जाए। देश के राजनीतिक पटल पर कांग्रेस का आधार घटता जा रहा है।

लोकतंत्र में पार्टियों के बनने और बिगड़ने का खेल चलता रहता है। जनता पार्टी और जन संघ जैसे दल आज इतिहास के पन्नों में सिमट कर रह गए है। आज कांग्रेस पार्टी को एक ऐसे नेता की आवश्यकता है, जो कार्यकर्ताओं में उत्साह भर सके और आम जनता की आवाज को बुलंद करे। यह चुनाव परिणाम कांग्रेस के लिए खतरे की घंटी है। लेकिन यह ध्यान रखने की जरूरत है कि एकध्रुवीय राजनीति और सत्ता दीर्घकालिक तौर पर जनता के हित में नहीं होती। इसी वजह से लोकतंत्र की मजबूती के लिए कांग्रेस का जीवित रहना जरूरी है।
’हिमांशु शेखर, केसपा, गया, बिहार

लापरवाही का हासिल

जिस तरह से चुनावी रैलियों के बाद अब कोरोना विस्फोट देखा जा रहा है। इस मसले पर चुनाव आयोग को हाईकोर्ट की फटकार पड़ी, साथ ही कोर्ट ने चुनाव आयोग को चुनाव रिजल्ट रोकने या घोषणा के समय कोविड-19 के नियमों का पालन करवाने की अपील की। लेकिन चुनावी रिजल्ट जारी होते ही लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी और कोविड-19 के नियमों की जम कर धज्जियां उड़ाई गईं।

इन विपरीत परिस्थितियों में इस तरह की लापरवाही देश को गहरे संकट में डाल सकती है। यह चुनाव आयोग की जिम्मेदारी थी कि रिजल्ट जारी होने पर भीड़ इकट्ठा न हो और पूरी एहतियात बरती जाए। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। एक तरफ केंद्र और सभी राज्य सरकारें हालात काबू करने में लगी हुई हैं, दूसरी ओर इस तरह की लापरवाही बरतना बिल्कुल भी उचित नहीं है!
’संजू तैनाण, चौबारा, हनुमानगढ़, राजस्थान

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