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खाली युवा

सुस्त अर्थव्यवस्था कोरोना महामारी के चलते और सुस्त हो गई है। महंगाई दिनोंदिन बढ़ती जा रही है।

Author Updated: February 24, 2021 8:39 AM
joblessसांकेतिक फोटो।

इसकी मार गरीब और आम आदमी पर साफ दिखाई दे रही है। पेट्रोल और डीजल के दाम आसमान छू रहे हैं। नौकरी गवां चुके और बेरोजगार युवा हताश हो रहे हैं। युवाओं की मानसिक स्थिति पर चोट पड़ रही है। अब युवा भाषण नहीं, रोजगार चाहते हैं।

भारत में पैंसठ फीसद आबादी युवाओं की है। यह एक गौरव की बात भी है और दुख की भी, क्योंकि युवाओं के हाथ खाली हैं। भले इसका एहसास मौजूदा सरकार को न हो, लेकिन एक दिन देश को जरूर होगा जब यह कहा जाएगा कि उस वक्त युवाओं का देश बेरोजगार था। सरकार भले किसी भी चीज में सफल हो जाए, लेकिन उसकी रोजगार नीति विफल साबित हो रही है।

सरकार को महंगाई कम करने के लिए जरूरी कदम उठाने की आवयश्कता है, वरना वे दिन दूर नहीं, जब देश की आम जनता सड़कों पर होगी। जिन युवाओं ने नेताओं को गद्दी पर बैठाया, वही युवा उन्हें गद्दी से उतारने की हिम्मत भी रखते हैं। युवा बस नौकरी और आत्मनिर्भरता चाहता है। सरकार को युवाओं की परेशानी समझनी होगी।

पढ़ने-लिखने के बाद भी अगर युवा बेरोजगार हैं, तो इसका दोष सरकार का है कि वह अपने युवाओं को रोजगार नहीं उपलब्ध करवा पा रही। अब खाली पोस्टरों के आंकड़ों पर नहीं, बल्कि हकीकत में रोजगार चाहिए।
’आशीष गुसार्इं, नई दिल्ली

सख्ती के बजाय

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कोरोना के फिर से उभरने के मद्देनजर संभावित पूर्णबंदी की चेतावनी दी है, लेकिन मुझे नहीं लगता कि यह उचित है। पूर्णबंदी समस्या का हल नहीं, बल्कि एक और समस्या है। पिछले साल के अचानक पूर्णबंदी ने हालात को बदतर बना दिया था। दिहाड़ी मजदूरों, फेरी वालों और रिक्शा चालकों को भुखमरी का सामना करना पड़ा था। हम अभी तक पिछले साल की पूर्णबंदी के निहितार्थ से बाहर नहीं आए हैं।

देश की अर्थव्यवस्था ध्वस्त हो गई है। तालाबंदी के कारण नौकरी गंवाने वालों को अभी तक रोजगार नहीं मिल पाया है। बहुत से माता-पिता और अभिभावक अब तक अपने बच्चों की स्कूल फीस का प्रबंध नहीं कर पाए हैं। ऐसे हालात में एक और पूर्णबंदी विनाशकारी होगी। यह अराजकता फैलाएगी, भुखमरी और आत्महत्या बढ़ाएगी।

इससे बेहतर यह है कि सरकार स्वास्थ्य, स्वच्छता के सिद्धांतों पर अधिक ध्यान दे। अनावश्यक सार्वजनिक समारोहों को रोक देना चाहिए। जनता में जागरूकता पैदा की जाए। प्रकोप के संभावित जोखिम को देखते हुए बुनियादी चिकित्सा देखभाल प्रदान किया जाए। महामारी से निपटने के लिए सरकारी मिशनरी को तैयार रखा जाए।
’साजिद महमूद शेख, ठाणे, महाराष्ट्र

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