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चौपाल : दाम और काम

सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने से सरकार के खजाने पर बोझ बढ़ना तय है, लेकिन इससे कई सामाजिक, आर्थिक और दीर्घकालिक वित्तीय फायदे भी होंगे।
Author नई दिल्ली | July 18, 2016 00:11 am
रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया।

सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने से सरकार के खजाने पर बोझ बढ़ना तय है, लेकिन इससे कई सामाजिक, आर्थिक और दीर्घकालिक वित्तीय फायदे भी होंगे। इससे लोगों के जीवन स्तर में सुधार के साथ-साथ बूढ़े होने पर उन्हें वित्तीय सुरक्षा का कवच मिलेगा। हालांकि यह बात सिर्फ केंद्र सरकार के कर्मचारियों पर लागू होगी, क्योंकि राज्य इस सिफारिश को अपना कर वित्तीय घाटे के दुष्चक्र में फंसने से बचना चाहते हैं। इसके अलावा वेतन बढ़ने से लोग ज्यादा खर्च करेंगे, जिससे बाजार में पैसा आएगा तो स्वत: मांग बढ़ेगी जिससे चीजों की उपलब्धता में इजाफा होगा। एक दिलचस्प बात यह है कि लोगों में बचत करने का माहौल बनेगा। वे अपने पैसे को बैंकों या डाकघर में जमा करेंगे, जिससे सरकार की बैंकिंग व्यवस्था मजबूत होगी। नजीजतन, आर्थिक क्रियाओं में बढ़ोतरी होगी और रोजगार सृजन करने में मदद मिलेगी।

इन सभी फायदों के विपरीत कुछ विसंगतियां भी हैं। जैसे सरकारी कर्मचारियों की परंपरागत कार्यशैली में बदलाव न होना, वेतन दोगुना होने के अनुरूप कार्य की उत्पादकता में बढ़ोतरी न होना। हाल में आइआइएम अमदाबाद ने अपने सर्वे में पाया कि सरकारी कर्मचारी वेतन दोगुना पाते हैं, लेकिन ‘आउटपुट’ आधा भी नहीं देते, जो चिंतनीय है। इसके समाधान के लिए त्रिवेदी समिति ने कर्मचारियों के लिए लक्ष्य तय किए थे। इन सिफारिशों को अविलंब लागू किया जाना चाहिए।

नीतीश कुमार, बेगूसराय, बिहार

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