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साक्षी महाराज: जुबान पर लगाम

ऐसा लग रहा है कि भाजपा नेताओं ने अपने बयानों से लोगों को लगातार जख्म देने की ठान ली है। भ्रष्टाचार मुक्त भारत, काले धन की वापसी, देश की सीमा की सुरक्षा, महंगाई रोकने आदि का नारा देकर सत्ता में आई भाजपा के नेता अब इन मुद्दों को दरकिनार कर लगातार ऐसे बोल बोल रहे […]

Author January 20, 2015 2:39 PM
साक्षी महाराज के गोडसे को देशभक्त बताने वाले बयान से उठा विवाद थमा भी नहीं था कि उन्होंने हिंदू औरतों को चार बच्चे पैदा करने की सलाह देकर फिर विवाद खड़ा कर दिया।

ऐसा लग रहा है कि भाजपा नेताओं ने अपने बयानों से लोगों को लगातार जख्म देने की ठान ली है। भ्रष्टाचार मुक्त भारत, काले धन की वापसी, देश की सीमा की सुरक्षा, महंगाई रोकने आदि का नारा देकर सत्ता में आई भाजपा के नेता अब इन मुद्दों को दरकिनार कर लगातार ऐसे बोल बोल रहे हैं जिनसे लोग आहत हो रहे हैं। इससे देश का सांप्रदायिक सद््भाव भी लगातार खतरे में पड़ता दिख रहा है। साक्षी महाराज के गोडसे को देशभक्त बताने वाले बयान से उठा विवाद थमा भी नहीं था कि उन्होंने हिंदू औरतों को चार बच्चे पैदा करने की सलाह देकर फिर विवाद खड़ा कर दिया। साक्षी महाराज अकेले नेता नहीं हैं जो ऐसे अनर्गल बयान देते रहे हैं। साध्वी निरंजन ज्योति, गिरिराज सिंह, प्रवीण तोगड़िया, मोहन भागवत ऐसे कई नाम हैं जो लगातार विवादित बयान देकर न केवल लोगों को उकसाने का काम करते रहे हैं बल्कि हिंदू-मसुलिम एकता को भी खंडित कर रहे हैं।

इन नेताओं के चुभते बोल को लेकर कई प्रश्न खड़े होते हैं। क्या भाजपा और उसके सहयोगी दलों के इस तरह का बयानों से देश की गंगा-जमुनी सभ्यता बची रहेगी? हमारा आकलन है कि कोई भी मुल्क सांप्रदायिकता को आधार बना कर विकास नहीं कर सकता है। आज कई ऐसे देश हैं जो सांप्रदायिक माहौल बिगड़ने से गृह युद्ध जैसी स्थितियों से जूझ रहे हैं। चाहे वह पाकिस्तान, अफगानिस्तान हो या सीरिया, फिलस्तीन, इराक, मिस्र आदि, सभी देशों में धार्मिक कट्टरता ही मूल वजह है वहां अशांति की। इसलिए जरूरी है कि मोदी भी अपने देश में गृह युद्ध जैसे हालात पैदा न हों इसलिए इस खतरे को भांप ऐसे बयानबाजों के विरुद्ध कार्रवाई करें। नसीहतों से यदि ये महानुभाव सीख लिए होते तो दुबारा ऐसे कड़वे बोल नहीं बोलते।

दूसरी बात यह कि साक्षी महाराज को यह उपदेश पहले अपने नेताओं को देना चाहिए जिन्होंने इनके लिहाज से बड़ी भूल की है। भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी, उमा भारती जैसे नेता इनकी पार्टी में हैं जिन्होंने शादी ही नहीं की। इन सबसे बढ़ कर प्रधानमंत्री मोदी हैं जिन्होंने शादी तो की लेकिन बहुत दिनों तक देशवासियों को झुठलाते रहे और जब यह भेद खुला तो पत्नी को अपनाने को तैयार नहीं। क्या हिंदू होने का यह मतलब है कि एक शादीशुदा महिला को उसका हक नहीं दिया जाए? साक्षी महाराज बताएंगे कि जो औरत किसी मर्द के नाम का सिंदूर अपने माथे पर लगाती है क्या उसे उसके अधिकार से वंचित रखा जाए? यह कौन-सा हिंदुत्व है?

जशोदा बेन ने सूचना के अधिकार के तहत कई बार यह जानने का प्रयास किया कि जब उन्हें प्रधानमंत्री की पत्नी के नाते सरकारी सुरक्षा दी जा रही है तो और अधिकारों से क्यों वंचित रखा जा रहा है? क्या इसका जवाब साक्षी महाराज देंगे? या यह समझा जाए कि ऐसे जनसेवक केवल बदजुबानी के शूल से लोगों को आहत करते रहेंगे?

 

अशोक कुमार, तेघड़ा, बेगूसराय

 

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