राह का रोड़ा

संपादकीय ‘आंदोलन का रास्ता’ पढ़ा। सर्वोच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट कर दिया है कि किसानों को आंदोलन का अधिकार है, मगर वे अनिश्चितकाल तक रास्ते रोक कर नहीं रख सकते।

सांकेतिक फोटो।

संपादकीय ‘आंदोलन का रास्ता’ पढ़ा। सर्वोच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट कर दिया है कि किसानों को आंदोलन का अधिकार है, मगर वे अनिश्चितकाल तक रास्ते रोक कर नहीं रख सकते, क्योंकि इससे लोगों को आने-जाने में असुविधा होती है, कई बार उन्हें घंटों जाम में फंसे रहना पड़ता है। मगर अपनी फसलों की वाजिब कीमत न मिलने से आत्महत्या करने को बाध्य लाखों किसानों के परिवार यह जानना चाहते हैं कि सरकार! आपको शहरों के लोगों को किसानों द्वारा किए जा रहे धरनों की वजह से होने वाली परेशानी तो दिखाई दे रही है, लेकिन लाखों की संख्या में निराशा-हताशा में खुदकुशी करते किसानों और उनके आश्रितों की व्यथा और चीत्कारें क्यों नहीं सुनाई देतीं!

इस देश के अन्नदाताओं को दिल्ली की सीमा से बाहर सड़कों पर भयंकर ठंड, भीषण गर्मी और बारिश में बैठने का कोई शौक नहीं है, दिल्ली की सत्ता संभाल रहे निजाम के अड़ियल रवैए की वजह से उन्हें मजबूर होकर यहां पर बैठना पड़ रहा है। पिछले ग्यारह महीनों में करीब सात सौ किसान काल का ग्रास बन चुके हैं! वे तो अपनी व्यथा सुनाने के लिए दिल्ली के बोट क्लब, जंतर मंतर, राष्ट्रपति भवन, इस देश के लोकतंत्र के सबसे बड़े मंदिर संसद भवन की ड्योढ़ी पर आकर अपनी करुणगाथा सुनाना चाहते थे। पर पुलिस ने उन्हें दिल्ली में घुसने की राह में अनेक बाधाएं खड़ी की। मसलन, हुकूमत ने उनके रास्ते में नुकीली बड़ी-बड़ी कीलें ठोक दीं। कंटीले तार बिछाए गए, उनकी बिजली तक काट कर उन्हें अंधेरे में बैठने को बाध्य किया गया। पीने के पानी की आपूर्ति बंद की गई!

हुजूर, आप समदर्शी हैं, न्याय करने वाले हैं, इसलिए हम इस देश के करोड़ों किसान आपसे बहुत विनीत भाव से गुहार लगाते हैं कि आप केंद्र सरकार के अधीन दिल्ली पुलिस को यह निर्देश दें कि वह अपने सारे रोड़े सड़क से हटा ले, ताकि केंद्र सरकार द्वारा धोखे से पारित तीनों काले कृषि कानूनों से आहत इस देश के चौरानबे करोड़ किसानों को इस सरकार की दुर्नीतियों के खिलाफ दिल्ली के जंतर मंतर, बोट क्लब या संसद भवन पहुंच कर, अपना सिर झुका कर अपनी व्यथा सुना सकें! हम चाहते हैं कि हमारे आपके बीच कोई बिचौलिया न रहे! हमें भी सड़क पर पिछले ग्यारह महीनों से बैठे रहने में अपार पीड़ा हो रही है और हमारे प्रिय बंधु-बांधव असमय काल के गाल में जा रहे हैं। हुजूर, आपके समदर्शी न्याय की आशा में इस देश के चौरानबे करोड़ अत्यंत दुखी और निराश इस देश के अन्नदाता हैं।
’निर्मल कुमार शर्मा, गाजियाबाद

बड़ी उपलब्धि

टीकाकरण अभियान का सौ करोड़ की संख्या पार कर लेना एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। प्रधानमंत्री ने इसके लिए सबके सहयोग की मुक्त कंठ से प्रशंसा की। देश और विश्व के अनेक देशों ने भी ‘टीम इंडिया’ तथा प्रधानमंत्री को बधाई भेजी है। इस तरह सबके साथ और सबके विश्वास से हर कठिन काम आसान हो जाता है, यह सिद्ध हो चुका है। इस तरह तन, मन और धन का भी विकास होना तय हो गया। यों कहा जा सकता है कि सभी लोगों ने अपने स्तर पर इस पुनीत कार्य में भरसक सहयोग किया, क्योंकि जनता को प्रधानमंत्री पर और प्रधानमंत्री को जनता पर भरोसा रहा।
’बीएल शर्मा ‘अकिंचन’, तराना, उज्जैन

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