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चौपालः डिजिटल के जोखिम

सरकार डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देने के लिए प्रयास कर रही है, लेकिन इसी बीच साइबर चोर काफी सक्रिय हो गए हैं। साइबर चोरी केवल लोगों को आर्थिक नुकसान नहीं पहुंचा रही है, बल्कि यह देश की सुरक्षा के लिए भी खतरा है।

Author September 12, 2018 3:15 AM
देश में बढ़ते साइबर अपराध या धोखाधड़ी के मामलों में साइबर अपराध विभाग को चुस्ती दिखानी चाहिए।

सरकार डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देने के लिए प्रयास कर रही है, लेकिन इसी बीच साइबर चोर काफी सक्रिय हो गए हैं। साइबर चोरी केवल लोगों को आर्थिक नुकसान नहीं पहुंचा रही है, बल्कि यह देश की सुरक्षा के लिए भी खतरा है। ऐसे चोर चोरी या धोखाधड़ी करने के लिए लोगों को कोई ऑफर या पैसे दोगुना करने का झांसा देकर फोन कॉल करके डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड का ब्योरा पूछ कर धोखाधड़ी करने की कोशिश कर रहे हैं। लोगों को चाहिए कि वे किसी भी झांसे में आकर अपनी खून-पसीने की कमाई बर्बाद न करें। साइबर चोरों की धोखाधड़ी से बचने के लिए लोगों को खुद भी जागरूक होना पड़ेगा और दूसरों को भी करना पड़ेगा। इसका सभी को खयाल रखना चाहिए कि वे अपना क्रेडिट और डेबिड कार्ड का पासवर्ड या पिन किसी के साथ भी साझा न करें।

देश में बढ़ते साइबर अपराध या धोखाधड़ी के मामलों में साइबर अपराध विभाग को चुस्ती दिखानी चाहिए। अगर किसी भी धोखाधड़ी की शिकायत साइबर अपराध के किसी भी ब्रांच में आती है तो उस पर तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि साइबर चोरों को संभलने का मौका न मिले। रिजर्व बैंक को भी चाहिए कि इसके लिए वह बैंकों को विशेष हिदायत दे कि बैंक अपनी कार्यप्रणाली को ज्यादा से ज्यादा सुरक्षित बनाएं, खासतौर पर ऑनलाइन लेनदेन के लिए।यह भी कहना उचित होगा कि सरकार सरकारी योजनाओं का दुरुपयोग रोकने के लिए आधार कार्ड को अनिवार्य बनाना चाहती है। लेकिन सरकार को इस पर पुनर्विचार करना चाहिए, क्योंकि देश में साइबर चोरों पर नकेल कसने के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं और देश की आबादी का एक बहुत बडा हिस्सा आज भी अशिक्षत और गैर जागरूक है। कहीं शातिर लोग आधार के सहारे व्यापक लूट न मचा दें।

राजेश कुमार चौहान, जालंधर

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