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चौपाल: पैसे का सदुपयोग

एक आकलन के अनुसार आज एक सांसद पर हर साल वेतन, भत्ते और अन्य सभी सुख-सुविधाओं को मिला कर एक करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च हो रहा है। अब तो प्रतिवर्ष इन्हें पांच करोड़ रुपए अपने क्षेत्र में ‘विकास’ के लिए दिए जाने का प्रावधान है। इस पर भी इन को संतोष नहीं है।

Author Published on: April 6, 2020 12:08 AM
संसद (फोटोः LSTV/PTI)

भारत की आबादी का बड़ा हिस्सा गरीबी, तंगहाली में जी रहा है। दूसरी ओर इसी देश में हर सुख-सुविधा, ऐश्वर्य, राजसी ठाठ-बाट से संपन्न अभिजात्य वर्ग है जिसमें शसक वर्ग और अधिकारियों आते हैं। यह वर्ग देश की गरीब जनता की मेहनत और कमाई से उगाहे जाने वाले करों से अपने लिए हर तरह की सुविधाएं हमेशा बनाए रखता है। एक आकलन के अनुसार आज एक सांसद पर हर साल वेतन, भत्ते और अन्य सभी सुख-सुविधाओं को मिला कर एक करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च हो रहा है। अब तो प्रतिवर्ष इन्हें पांच करोड़ रुपए अपने क्षेत्र में ‘विकास’ के लिए दिए जाने का प्रावधान है। इस पर भी इन को संतोष नहीं है।

इनका कथन है कि सिर्फ पांच करोड़ सालाना से क्षेत्र का समुचित विकास नहीं हो पाता, इसलिए सांसद निधि को कम से कम इसे पांच गुना बढ़ा कर प्रतिवर्ष पच्चीस करोड़ किया जाना चाहिए। दूसरी ओर भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने भी सांसद निधि प्रथा को भ्रष्टाचार का जरिया माना है। कैग के अनुसार वैसे भी आज के भारतीय संसद में तैंतीस प्रतिशत दागी सांसद हैं, उनसे सांसद निधि का पैसा ईमानदारी से खर्च करने की आशा करना ही व्यर्थ है, इसलिए सांसद निधि देशहित में तुरंत बंद होनी चाहिए या इसे गहन जांच के दायरे में लाया जाना चाहिए, ताकि भारत जैसे गरीब देश के लोगों के इस पैसे का इस्तेमाल सांसद अपनी मौजमस्ती, अपने बंगलों के फर्नीचर खरीदने और विलासिता के सामान से भरने में न कर सकें।

देश इस वक्त कोरोना महामारी के संकट से जूझ रहा है। इस गंभीर राष्ट्रीय आपदा के संकट को देखते हुए लोकसभा के 552 और राज्यसभा के 250 सदस्यों, मतलब कुल 802 वर्तमान सांसदों की कुल सांसद निधि, जो खरबों रुपए में बैठती है, उसे अगले पांच साल तक के लिए रोककर इस रकम का सदुपयोग भारत की जर्जर हो चुकी स्वास्थ्य सेवाओं को दुरस्त करने यथा डाक्टरों, नर्सों की पर्याप्त संख्या बढ़ाने और जीवनरक्षक दवाइयों और उपकरणों जैसे मास्क, दस्ताने, निजी सुरक्षा उपकरण, स्ट्रेचर, वेंटिलेटर आदि की भयंकर कमी दूर करने और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने पर खर्च किया जाना चाहिए।
’निर्मल कुमार शर्मा, गाजियाबाद

सबसे असुरक्षित
कोरोना महामारी से निपटने के लिए बहुत से लोग अपना कर्तव्य बखूबी निभा रहे हैं। देश में मीडियाकर्मियों, स्वास्थ्यकर्मियों और पुलिसकर्मियों की हर तरफ सराहना हो रही है। लेकिन कुछ लोग और भी हैं जो अपना काम बखूबी कर रहे हैं, लेकिन उनकी सुरक्षा पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। सब्जीवाले, सफाईकर्मी अभी भी घर-घर जाकर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। ये लोग न जाने कितने लोगों के संपर्क में आते हैं, जिनमें से कोई भी संक्रमित हो सकता है। इनके पास सुरक्षा किट नहीं हैं, जो उन्हें सुरक्षा प्रदान कर सकें। इन लोगों पर कोरोना से संक्रमित होने का खतरा ज्यादा मंडराता रहता है। इनकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन को हर क्षेत्र में सब्जीवालों और सफाईकमिर्यों को मास्क एंव दस्ताने उपलब्ध कराने चाहिए।
’भूपेंद्र कुलदीप सिंह, सोनीपत

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