reservation system needs to think in a new way - चौपालः आरक्षण का आधार - Jansatta
ताज़ा खबर
 

चौपालः आरक्षण का आधार

देश भर में आरक्षण के लिए नियमित अंतराल पर जातिगत आंदोलन हो रहे हैं। इसके मद्देनजर पूरी आरक्षण प्रणाली पर अब नई तरह से सोचने की जरूरत है।

Author August 9, 2018 4:32 AM
प्रतीकात्मक चित्र

आरक्षण का आधार

देश भर में आरक्षण के लिए नियमित अंतराल पर जातिगत आंदोलन हो रहे हैं। इसके मद्देनजर पूरी आरक्षण प्रणाली पर अब नई तरह से सोचने की जरूरत है। अगर संविधान के तमाम प्रावधानों की समीक्षा हो सकती है तो आरक्षण की क्यों नहीं हो सकती? स्वस्थ लोकतंत्र में ऐसा होना भी चाहिए। संविधान के अनुच्छेद 15 और 16 में सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षण का प्रावधान किया गया है, लेकिन समय की मांग है कि संविधान में संशोधन करके उसमें आर्थिक पिछड़ेपन को भी एक श्रेणी बनाया जाए। अच्छी बात यह है कि सरकार अनुसूचित जाति/ जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लोगों को संविधान से मिले आरक्षण को बिना छेड़े आर्थिक आधार पर सभी जातियों के लिए आरक्षण देने पर विचार कर रही है। गरीब, गरीब होता है फिर चाहे वह अगड़ी जाति से हो या पिछड़ी जाति से। उसका कोई भी धर्म हो, मुसलिम हो या हिंदू, सभी समुदायों में एक धड़ा है। गरीबी अपमानजनक नहीं है, लेकिन इसकी भयावहता पीड़ादायक है। इसलिए सरकार को आर्थिक आधार पर भी आरक्षण देने का क्रांतिकारी निर्णय लेने में हिचक नहीं दिखानी चाहिए, क्योंकि इससे गैर बराबरी दूर करने में मदद तो मिलेगी ही, साथ ही ऐसा करने से बार-बार नई-नई जातियों से उठने वाली आरक्षण की मांग का भी निदान हो सकेगा।

अब इस सवाल पर भी सरकार और संसद को सोचना होगा कि क्या आरक्षण का लाभ एक बार मिलना चाहिए या बार-बार और पीढ़ी-दर-पीढ़ी? आरक्षण के बल पर जो उच्च पदों पर पहुंच गए, विधानसभाओं और संसद तक में आ गए, मंत्री और राज्यपाल तक बन गए, क्या उनके बच्चे भी आरक्षण के हकदार होने चाहिए? आरक्षण को खत्म हरगिज नहीं किया जा सकता क्योंकि वंचितों और समाज के सबसे पिछड़े पायदान पर रहने वाले समाजों को तो आरक्षण की सख्त जरूरत है। लेकिन जो उसके वास्तविक हकदार हैं, केवल उन्हीं लोगों को उसका लाभ मिले। यह शिकायत आम है कि आरक्षण का लाभ संबंधित आरक्षित वर्ग के तहत आने वाले सभी लोगों को समान रूप से नहीं मिल पा रहा है। आरक्षण के दीर्घकालिक समाधान पर बात करें तो सरकारों को आर्थिक और सामाजिक रूप से पिछड़े बच्चों को सस्ती और अच्छी शिक्षा उपलब्ध कराने पर बहुत अधिक ध्यान देना चाहिए, जिससे वे अन्य बच्चों के साथ बराबरी से प्रतिस्पर्धा कर सकें और अपने लिए खुद अवसर प्राप्त कर लें। ऐसे में आरक्षण की आवश्यकता ही नहीं रह जाएगी।

कैलाश एम बिश्नोई, जोधपुर

दुरुस्त आयद

समाचार है कि सरकार भारतीय पासपोर्ट अधिनियम में एक महत्त्वपूर्ण संशोधन करने जा रही है। अब जो कोई व्यक्ति किसी बैंक या वित्तीय संस्थान का 50 करोड़ से अधिक रुपया दबाए बैठा है वह देश छोड़ कर नहीं जा सकेगा। भारत के हर एअरपोर्ट/ बंदरगाह पर उसको रोके जाने की इत्तिला होगी। यानी आगे और कोई विजय माल्या, नीरव मोदी या मेहुल चोकसी नहीं पैदा होगा। इस प्रकार के स्वागतयोग्य निर्णय की बहुत दिनों से प्रतीक्षा थी।

आस्था गर्ग, बागपत रोड, मेरठ

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App