नोटबंदी का असर - Jansatta
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चौपाल: नोटबंदी का असर, कैसी शर्त

केंद्रीय सांख्यिकीय संगठन की ओर से जारी चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही के आर्थिक वृद्धि दर के आंकड़े नोटबंदी से लगभग बेअसर दिखे।

Author March 2, 2017 6:12 AM
केंद्रीय सांख्यिकीय संगठन की ओर से जारी चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही के आर्थिक वृद्धि दर के आंकड़े नोटबंदी से लगभग बेअसर दिखे। आठ नवंबर को हुई नोटबंदी से तमाम वित्तीय संस्थाओं विश्व बैंक, आईएमएफ, मूडीज और स्टैंडर्ड एंड पुअर्स ने वृद्धि दर एक से दो फीसद तक गिरने के अनुमान लगाए थे।

नोटबंदी का असर

केंद्रीय सांख्यिकीय संगठन की ओर से जारी चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही के आर्थिक वृद्धि दर के आंकड़े नोटबंदी से लगभग बेअसर दिखे। आठ नवंबर को हुई नोटबंदी से तमाम वित्तीय संस्थाओं विश्व बैंक, आईएमएफ, मूडीज और स्टैंडर्ड एंड पुअर्स ने वृद्धि दर एक से दो फीसद तक गिरने के अनुमान लगाए थे। हालांकि आंकड़ों को क्षेत्रवार देखें तो पता चलता है कि विनिर्माण क्षेत्र में वर्ष 2015-16 की तीसरी तिमाही में वृद्धि दर जहां लगभग 13 फीसद थी, जो वर्तमान चालू वर्ष की तिमाही में गिरकर 8.3 फीसद हो गई। इसका मतलब है कि विनिर्माण क्षेत्र नोटबंदी से काफी प्रभावित हुआ था। इसके अलावा वित्त और रियल एस्टेट क्षेत्र की समान अवधि में वृद्धि दर 10.4 फीसद से गिरकर 3.1 हो गई।

कुल मिलाकर भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बनी हुई है। लेकिन भारत को इससे संतुष्ट नहीं होना चाहिए कि क्योंकि भारतीय अर्थव्यवस्था में दस फीसद से ज्यादा वृद्धि दर से आगे बढ़ने की क्षमता है अगर द्वितीय पीढ़ी के आर्थिक सुधारों की दिशा में सरकार कदम उठाती है। इसके अलावा सरकार को इस बात पर भी ध्यान देना चाहिए कि आर्थिक वृद्धि दर को कैसे समावेशी और रोजगार के अनुकूल बनाया जाए। पिछले पच्चीस वर्षों में भारत में आर्थिक संवृद्धि के जरूर पंख लगे हैं पर आय की असमानता को कम करने और रोजगार के अवसर बढ़ाने में वृद्धि दर लगभग विफल रही है।

’कैलाश मांजु बिश्नोई, मुखर्जी नगर, दिल्ली 

 

कैसी शर्त

जमीयत उलेमा-ए-हिंद के महासचिव मौलाना महमूद मदनी ने असम में स्वच्छता पर आयोजित एक सम्मेलन के उद््घाटन के मौके पर बयान दिया कि जिस घर में शौचालय न हो वहां मौलवी और मुफ्ती निकाह पढ़ाने न जाएं। खुले में शौच नहीं करने और अपने घरों में शौचालय बनवाने के लिए लोगों को प्रेरित और जागरूक करना बहुत अच्छा और सराहनीय कदम है। साफ-सफाई के बारे में कुरान और हदीसों में निर्देश मौजूद हैं। कुरान में कहा गया है कि ‘अपने दामन को पवित्र रखो और गंदगी से दूर रहो।’ ऐसा ही हदीस में है कि ‘स्वच्छता, पवित्रता और साफ-सफाई आधा ईमान है।’

बुनियादी तौर पर हर घर में शौचालय होना जरूरी है लेकिन अगर कोई गरीब आदमी पैसे और जगह की किल्लत की वजह से घर में शौचालय नहीं बनवा पाता है तो क्या इससे उसके घर में शादी नहीं हो पाएगी? ऐसा कठोर फैसला गरीबों पर थोपना सही नहीं होगा। फिर प्यारे नबी की इस हिदायत का क्या अर्थ होगा जिसमें कहा गया है, ‘निकाह को आसान बनाओ और जिना (व्यभिचार) को कठिन।’

’आसिफ खान, बाबरपुर, शाहदरा, दिल्ली

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